ट्रैफिक चालान नहीं भरने पर कटेगी बिजली! रुक सकते वाहन से जुड़े काम, सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रैफिक चालान को लोगों के बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया ताकि जुर्माने की रकम वसूली की जा सके।
Supreme Court traffic challan: ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद ई-चालान भरने में लापरवाही करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदमों पर विचार करने को कहा है। अदालत ने सुझाव दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बकाया ई-चालान की रकम वसूलने के लिए व्यावहारिक तरीके तलाशने चाहिए। इनमें बकाया चालान को बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव भी शामिल है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सोमवार को एस. राजसीकरन बनाम भारत संघ मामले में ई-चालान और ट्रैफिक नियमों के इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सिर्फ ई-चालान काटना काफी नहीं: SC
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि सिर्फ बड़ी संख्या में ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल इन चालानों पर लगाई गई जुर्माने की रकम की वसूली का है। अदालत ने सुझाव दिया कि अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो बकाया रकम को बिजली के बिल से जोड़ने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इससे बकाया चालान जमा कराने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं, तो इसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दें। उन्हें बिजली का बिल भरना होगा, नहीं तो बिजली की लाइन काट दी जाएगी। इसका कोई तरीका निकालें। इस देश में आपको कोई न कोई रास्ता तो खोजना ही होगा।
वाहनों की पहचान और जब्ती सुझाव
पीठ ने ट्रैफिक चलान को बिजली बिल से जोड़ने के अलावा, उन वाहनों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने और उनके मालिकाना हक के ट्रांसफर को रोकने लगाने का भी सुझाव दिया, जिनके चालान का भुगतान नहीं किया गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने उन गाड़ियों की पहचान करने के लिए रैंडम चेकिंग का सुझाव भी दिया, जिनके ई-चालान का भुगतान नहीं हुआ है। पीठ ने वाहनों की रैंडम चेकिंग होनी चाहिए और ई-चालान का भुगतान नहीं होने का पता चलने पर तो गाड़ी जब्त करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों के पालन और दुर्घटना के बाद पीड़ितों की देखभाल में व्यापक सुधार से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
20 हजार करोड़ के ट्रैफिक चालान बकाया
कोर्ट को बताया गया कि राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में करीब ₹45 हजार करोड़ के ई-चालान हुए, इनमें ₹25 हजार करोड़ वसूले गए हैं जबकि ₹20 हजार करोड़ के चालान बकाया हैं।
2012 से चल रही सुनवाई
यह मामला 2012 में कोयंबटूर के ऑर्थोपेडिक सर्जन एस. राजसीकरन की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में सड़क सुरक्षा, सड़क हादसों को कम करने, बेहतर बुनियादी ढांचे और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को उचित सहायता उपलब्ध कराने के लिए समन्वित कदम उठाने की मांग की गई है।





