मेहराब हटाते भावुक हुए लोग, शाही मस्जिद विवाद के बीच शहर काजी बोले- अफवाहों से दूर रहें
उज्जैन शाही मस्जिद विवाद के बीच शहर काजी खलीकुर्रे रहमान ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मामला आपसी सहमति से सुलझ चुका है और मस्जिद के निर्धारित हिस्से को समाज की सहमति से हटाने की प्रक्रिया जारी है।
Ujjain Shahi Masjid controversy: शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर उज्जैन में बने तनाव के बीच शहर काजी खलीकुर्रे रहमान ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़ा विषय रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था और लोगों को किसी तरह की अफवाह के आधार पर मौके पर पहुंचने की जरूरत नहीं है। प्रशासन की ओर से भी लोगों से शांति बनाए रखने और बिना पुष्टि वाली सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की जा रही है।
शहर काजी ने क्या कहा?
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शहर काजी का वीडियो साझा किया गया है। वीडियो में वह लोगों से अपील करते हुए कहते हैं कि मस्जिद का मामला आपसी सहमति से सुलझ चुका है। उन्होंने कहा कि जिस काम को पूरा करने का निर्णय लिया गया है, उसे आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी अफवाह के चलते घर से बाहर निकलकर घटनास्थल पर जाने से बचें। शहर काजी ने लोगों से संयम बनाए रखने और स्थिति को अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण नहीं बनाने की अपील की।
मेहराब हटाते समय भावुक हुए लोग
बता दें, मस्जिद के निर्धारित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया के दौरान कुछ लोग भावुक भी नजर आए। कुछ लोगों ने हथौड़े से मेहराब का हिस्सा हटाना शुरू किया। इस दौरान वे भावुक होकर रो पड़े और धार्मिक भावनाओं के कारण अल्लाह से माफी मांगी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक करने वाला रहा। हालांकि, प्रशासन की ओर से पूरी प्रक्रिया को कानून-व्यवस्था के दायरे में पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।
सिंहस्थ 2028 के लिए चल रहे विकास कार्य
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क, यातायात और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई काम किए जा रहे हैं। शहर में श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मार्गों को व्यवस्थित और चौड़ा करने की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसी विकास प्रक्रिया के दौरान शाही मस्जिद के एक हिस्से को लेकर विवाद सामने आया। मामले को लेकर मुस्लिम समाज की ओर से आपत्ति जताई गई थी और प्रशासन के साथ बातचीत का दौर चला।




