MP News: अंशकालीन कर्मचारियों का BJP कार्यालय के सामने धरना, न्यूनतम वेतन 12 हजार करने की मांग
अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देना, सेवा नियम बनाने और लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग शामिल है।

MP News: मध्य प्रदेश में अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों ने अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर भोपाल में आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कर्मचारी सोमवार को राजधानी पहुंचे और बीजेपी प्रदेश कार्यालय के सामने धरने पर बैठे। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम वेतन तय करने और उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की है।
प्रदर्शन में ग्राम पंचायतों के चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मियों के साथ स्कूलों और छात्रावासों में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा जनजातीय कार्य विभाग और दूसरे सरकारी संस्थानों में अंशकालिक या अस्थाई तौर पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भी आंदोलन में शामिल होने की बात कही गई है।
12 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांग है कि अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों को कम से कम 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। उनका कहना है कि कई कर्मचारियों को अभी भी बहुत कम मानदेय मिल रहा है। कुछ श्रेणियों में यह राशि करीब 2 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि इतने कम मानदेय में मौजूदा महंगाई के बीच परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार कई लोग लंबे समय से सरकारी विभागों से जुड़े काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
न्यूनतम वेतन के अलावा कर्मचारियों ने सेवा से जुड़ी कई दूसरी मांगें भी रखी हैं। इनमें अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देना, सेवा नियम बनाने और लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग शामिल है।
कर्मचारी संगठनों ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं देने की भी मांग की है। इनमें पीएफ, ईएसआई, पेंशन, बीमा और इलाज जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा कर्मचारियों ने बकाया मानदेय और पात्र एरियर का भुगतान करने की मांग भी उठाई है।
दो दिन कामबंद रखना का ऐलान
आंदोलन से जुड़े संगठनों ने 28 और 29 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन के साथ कामबंद आंदोलन की घोषणा की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए राजधानी में जुटे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने का रास्ता अपनाया जाएगा।
इस पूरे आंदोलन में मुख्य मुद्दा कम मानदेय पर लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और सेवा सुरक्षा का लाभ दिलाना है। अब सरकार की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।



