MP में आज से नई बस सेवा शुरू, 351 बसें दौड़ेंगी; जानिए किस शहर में कितनी बसें चलेंगी?
मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होगी। पहले चरण में सात शहरों में 351 बसें चलेंगी, 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य है।
मध्यप्रदेश में 21 साल बाद लोक परिवहन व्यवस्था नए स्वरूप में शुरू होने जा रही है। 25 सितंबर को भोपाल से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत करेंगे। पहले चरण में सात शहरों को जोड़ा गया है। योजना का विस्तार गांवों से शहरों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाएगा।
इंदौर में सबसे ज्यादा 145 बसें
पहले चरण में इंदौर को सबसे ज्यादा 145 बसें मिलेंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। भोपाल में 106 बसें चलेंगी, जबकि जबलपुर में 67 बसें शुरू होंगी। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें संचालित की जाएंगी।
2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
सरकार ने पहले साल 1,500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा है। इसके बाद हर साल करीब 2,500 से 3,000 बसें सेवा में जोड़ी जाएंगी। योजना के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश में 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य है। बसों का संचालन निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के जरिए किया जाएगा।
बसों में CCTV और पैनिक बटन
नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए कई सुविधाएं होंगी। बसों में CCTV कैमरे, पैनिक बटन और लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए बसों की लाइव लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर नजर रखी जाएगी। यात्रियों को पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम से बस और यात्रा से जुड़ी जानकारी मिलेगी।
कमांड सेंटर से होगी निगरानी
बसों की निगरानी यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों में स्थापित कमांड-कंट्रोल सेंटर से की जाएगी। निजी बस ऑपरेटरों को विज्ञापन और कार्गो जैसी नॉन-फेयर सेवाओं से अतिरिक्त आय के अवसर भी दिए जाएंगे। आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं को भी योजना में शामिल किया गया है।
ड्राइवरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
बसों के संचालन के लिए चालकों को तकनीकी और सुरक्षित यातायात व्यवस्था का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इंदौर और छिंदवाड़ा में ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं। भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में पांच रीजनल ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। जिला स्तर पर भी 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।






