महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट में कटेंगे 1.51 लाख पेड़, सिर्फ 17 हजार पेड़ों को बचाने की तैयारी
महू-खंडवा रेल परियोजना के लिए अक्टूबर से करीब 1.34 लाख पेड़ों की चरणबद्ध कटाई शुरू होगी। इंदौर और खरगोन की 454 हेक्टेयर वनभूमि परियोजना में शामिल है। सुरंगों और वायडक्ट की मदद से करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने की योजना है। प्रतिपूरक पौधरोपण भी किया जाएगा।
Mhow-Khandwa Rail Project : मध्यप्रदेश में महू-खंडवा रेल परियोजना के निर्माण को रफ्तार देने की तैयारी के साथ अब वन क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की कटाई भी शुरू होगी। रेलवे और वन विभाग अक्टूबर से करीब 1.34 लाख पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। यह काम रेलवे लाइन के निर्माण की प्रगति के अनुसार अगले दो से तीन वर्षों में किया जाएगा।
454 हेक्टेयर वन क्षेत्र परियोजना में शामिल
जानकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए इंदौर और खरगोन जिले की करीब 454 हेक्टेयर वनभूमि प्रभावित हो रही है। इसमें इंदौर वनमंडल की लगभग 407 हेक्टेयर और खरगोन की करीब 46 हेक्टेयर जमीन शामिल है। शुरुआती सर्वे में करीब 1.51 लाख पेड़ों को बाधक माना गया था। बाद में निर्माण तकनीक में बदलाव और सुरंग-वायडक्ट के इस्तेमाल से करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने की योजना तैयार की गई।
20 किलोमीटर हिस्से में बनेंगी 16 सुरंगें
बता दें, रेल लाइन के करीब 20 किलोमीटर हिस्से में 16 सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है। बड़िया-बेका, चोरल-मुख्तियार बलवाड़ा और राजपुर के आसपास भी सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। कुछ हिस्सों में वायडक्ट बनाकर रेल मार्ग को वन क्षेत्र के बीच से निकालने की योजना है। इन तकनीकी उपायों का उद्देश्य निर्माण के दौरान वन क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को सीमित करना है।
परियोजना को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मार्च में सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी थी। रेलवे ने अप्रैल में पेड़ों की कटाई और लकड़ी के परिवहन से जुड़ी राशि भी जमा की थी। हालांकि, भुगतान राशि गलत वनमंडल के खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में देरी हुई। बाद में जुलाई में विभागीय स्तर पर मामला सुलझाया गया। मानसून के दौरान पेड़ों की कटाई पर रोक के चलते अब अक्टूबर से काम शुरू करने की तैयारी है।
वन विभाग को करीब 150 करोड़ रुपये
वहीं, परियोजना के बदले रेलवे वन विभाग को लगभग 150 करोड़ रुपये देगा। इसमें वनभूमि, पेड़ों की कीमत, प्रतिपूरक पौधरोपण और परिवहन समेत अन्य खर्च शामिल हैं। इंदौर वनमंडल में उपयुक्त खाली जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण धार और झाबुआ के वन क्षेत्रों में करीब 1,000 हेक्टेयर में पौधरोपण की योजना है। पेड़ों की कटाई के लिए 20 चरण निर्धारित किए गए हैं और रेलवे-वन विभाग की संयुक्त टीम प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
पर्यावरण पर कितना पड़ेगा असर?
करीब 1.34 लाख पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की हरित आवरण, जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ने की आशंका है। पेड़ों की संख्या घटने से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सोखने की प्राकृतिक क्षमता भी कम होगी, जबकि ऑक्सीजन (O₂) उत्पादन में भी कमी आएगी। इसके अलावा मिट्टी के कटाव, स्थानीय तापमान, नमी और जल संरक्षण पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सुरंगों और वायडक्ट के जरिए करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने तथा नए पौधरोपण की योजना से पर्यावरणीय नुकसान को कुछ हद तक कम करने का प्रयास किया जा रहा है।




