SIR पर संग्राम: कांग्रेस के शासनकाल में 7 बार हुआ SIR, फिर 9वें पर क्यों भिड़ी?
देश में SIR को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस ने प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं को शामिल करने की प्रक्रिया बताता है। पुराने SIR रिकॉर्ड भी अब चर्चा में हैं।
9th SIR Sparks Political Row: देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज बना हुआ है। कांग्रेस मौजूदा प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। सितंबर 2026 में बिहार कांग्रेस ने SIR से जुड़े फैसलों को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग भी की है।
SIR को लेकर चुनाव आयोग
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं को शामिल करना और मृत, स्थान बदल चुके या अपात्र मतदाताओं की प्रविष्टियों की पहचान करना है। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 के तहत इस प्रक्रिया को संचालित करने की बात कही है।
पहले भी 8 बार हो चुका SIR
बता दें, भारत में अब तक 8 SIR हो चुका है, जिसमें से 7 बार SIR कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों के दौरान हुए थे। चुनाव आयोग/सरकारी रिकॉर्ड में 8 पुराने SIR दर्ज हैं-
· 1st: 1952-56 — जवाहरलाल नेहरू
· 2nd: 1957-61 — जवाहरलाल नेहरू
· 3rd: 1965-66 — लाल बहादुर शास्त्री
· 4th: 1983-84 — इंदिरा गांधी
· 5th: 1987-89 — राजीव गांधी
· 6th: 1992-93 — पी.वी. नरसिम्हा राव
· 7th: 1995 — पी.वी. नरसिम्हा राव
· 8th: 2002-04 — अटल बिहारी वाजपेयी के NDA शासन में शुरू हुआ और 2004 में मनमोहन सिंह के कार्यकाल में पूरा हुआ।
2025-26 में कई राज्यों तक पहुंचा SIR
बिहार में SIR के बाद चुनाव आयोग ने नवंबर 2025 में दूसरे चरण के तहत 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में प्रक्रिया शुरू की थी। आयोग के अनुसार इस चरण में करीब 51 करोड़ मतदाताओं से जुड़ी मतदाता सूचियों की समीक्षा होनी थी।
कांग्रेस के सवाल क्या हैं?
कांग्रेस ने मौजूदा SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। कांग्रेस ने प्रक्रिया की पारदर्शिता, दस्तावेजों की मांग और नाम हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और चुनाव आयोग के फैसले लेने के तरीके पर भी आपत्ति जताई है।





