उज्जैन में कई मंदिर पीछे शिफ्ट किए गए, 323 मकान तोड़े गए; मस्जिद का 3 फीट हिस्सा गिराने के लिए हो गया बवाल
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम आने वाले समय में भी जारी रहने वाला है। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों के साथ कानून-व्यवस्था और अफवाहों पर नियंत्रण बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
MP News: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में कई धार्मिक स्थलों को शिफ्ट किया गया, बड़ी संख्या में मकान तोड़े गए। यहां तक कि विकास काम की जद में आ रहे मुख्यमंत्री के पैतृक मकान को भी तोड़े जाने की कार्रवाई की गई। लेकिन जैसे ही शाही मस्जिद का 3 फीट का हिस्सा गिराने की बात आई तो बवाल हो गया। रविवार और सोमवार लगातार दो दिन पत्थरबाजी की गई। इसमें महिला पुलिस अधिकारी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या कट्टरपंथी ताकतें कानून को हाथ में लेने और अराजकता फैलाने में जरा भी गुरेज नहीं करती हैं।
900 मीटर लंबे मार्ग का किया जा रहा है चौड़ीकरण
इसी परियोजना के दायरे में आने वाले धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्सों को भी हटाया जा रहा है। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। इस दौरान कई मंदिरों और मस्जिदों के हिस्सों को पीछे किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह काम सड़क की क्षमता बढ़ाने और सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है।
कई मंदिर 9-9 फीट पीछे शिफ्ट, 14 धार्मिक स्थल तोड़े गए
इस मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले कई धार्मिक स्थलों को पहले ही हटाया जा चुका है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मंदिरों को करीब 9 फीट तक पीछे शिफ्ट किया गया है, जबकि प्रभावित धार्मिक ढांचों की संख्या को लेकर प्रशासनिक आंकड़ों में 14 का उल्लेख है। इनमें से अधिकांश के प्रभावित हिस्सों को हटाया जा चुका है। इसके अलावा सड़क के लिए बड़ी संख्या में मकानों और दुकानों के हिस्से भी हटाए जा रहे हैं।
शाही मस्जिद के 3 फीट के हिस्से को लेकर हो गया बवाल
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा छत्री चौक की शाही मस्जिद को लेकर हो रही है। सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का जो हिस्सा रास्ते में आ रहा है, उसे हटाने पर प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच सहमति बनी है। इसके बाद प्रभावित हिस्से को हटाने का काम आगे बढ़ाया गया। प्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई पूरी मस्जिद को हटाने के लिए नहीं, बल्कि केवल सड़क की जद में आने वाले हिस्से को हटाने के लिए है।
मामले में सोमवार को विरोध के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान पथराव हुआ, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर भी नजर रख रही है।
हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की अपील की खारिज
शाही मस्जिद से जुड़ा विवाद अदालत तक भी पहुंचा। 28 सितंबर को इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर दी। अदालत से सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद प्रशासन के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।
वहीं, प्रशासन और स्थानीय स्तर पर यह बात कही गई है कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में अलग-अलग समुदायों के लोगों ने अपने-अपने धार्मिक स्थलों और निर्माण के प्रभावित हिस्से हटाने में सहयोग किया है। सोमवार को हुए विवाद के बाद भी मस्जिद कमेटी की ओर से निर्धारित हिस्से को हटाने पर सहमति बनी रही।
प्रशासन ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की
इस बीच सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने का एक वीडियो भी वायरल हुआ। पुलिस के अनुसार यह वास्तविक वीडियो नहीं, बल्कि एआई से तैयार किया गया फर्जी वीडियो था। इसमें मस्जिद को पूरी तरह गिरा हुआ दिखाया गया, जबकि वास्तविक कार्रवाई केवल सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्से तक सीमित है। पुलिस ने लोगों से ऐसे वीडियो और भ्रामक पोस्ट पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम आने वाले समय में भी जारी रहने वाला है। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों के साथ कानून-व्यवस्था और अफवाहों पर नियंत्रण बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।


