‘मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई’, CJP प्रोटेस्ट पर स्टूडेंट को नोटिस भेजने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।

SupremeCourt: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस से जुड़ा है। यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उठाया। उन्होंने बताया कि छात्र को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस दिया गया था। वकील के मुताबिक, यह कार्रवाई तब की गई, जब सुप्रीम कोर्ट छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और छात्रों के खिलाफ भविष्य में किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका है।
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा ?
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’
छात्र को नोटिस क्यों दिया गया?
4 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में पुलिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि अक्षत त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहे थे। उन पर छात्रों को कॉकरेच जनता पार्टी के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया गया। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी कथित गतिविधियों से काफी तनाव पैदा हुआ। इससे लड़ाई-झगड़े और शांति भंग होने की आशंका भी जताई गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 126 और 135 के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार माना।
'कार्रवाई से छात्रों में डर का माहौल बन सकता है'
वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया कि यह नोटिस नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया था और तर्क दिया कि ऐसी कार्रवाई से छात्रों में ‘डर का माहौल’ बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस कार्रवाई को कोर्ट की अवमानना के बराबर भी बताया। सीजेआई ने वकील से कहा कि वे एक याचिका के जरिए नोटिस को रिकॉर्ड पर लाएं और संकेत दिया कि सुप्रीम कोर्ट संबंधित अथॉरिटी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगेगा।






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