दिल्ली हॉस्टल हादसे में हाई कोर्ट सख्त, नगर निगम - DU को बताया जिम्मेदार, कहा-सरकार भी जवाबदेही से नहीं बच सकती
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के मामले में दाखिल जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली विश्वविद्यालय सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत ढहने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है 12 लोगों को बचाया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर संज्ञान लेते हुए तत्काल सुनवाई की। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- इस हादसे के लिए सिर्फ बिल्डिंग के मालिक ही नहीं, बल्कि दिल्ली नगर निगम और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों जिम्मेदार हैं। हाई कोर्ट ने सरकार से हफ्तेभर के अंदर सभी हॉस्टलों की जानकारी मांगी है।
याचिकाकर्ता के वकील की दलील
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील रखी कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जहां मासूम छात्र अपनी जान गंवा देते हैं। कभी आग लगती है, कभी पानी भरता है तो कभी इमारत ढह जाती है। इसमें MCD को कुछ करना चाहिए।
सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती- HC
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से सवाल किया कि राजधानी में ऐसी घटनाएं बार-बार होने के बावजूद इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी त्रासदियां हर कुछ वर्षों में सामने आती है और यह बेहद गंभीर स्थिति है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि बचाव अभियान पूरी गंभीरता और तेजी के साथ चलाया जाए। अदालत ने कहा कि दिल्ली में बाहर से आए छात्रों के लिए हॉस्टल में दयनीय हालात हैं। भारी संख्या में पढ़ाई के लिए छात्र बाहर से दिल्ली आते हैं। छात्र देश का भविष्य हैं। सरकार को उनके लिए हॉस्टल का इंतजाम करने के लिए विचार करना चाहिए।
MCD को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को फटकार भी लगाई। हाई कोर्ट ने कहा कि यह MCD और अन्य संबंधित अथॉरिटी की भी जिम्मेदारी है कि दिल्ली में होने वाला हर निर्माण नियमों के अनुरूप हो। कोर्ट ने MCD को एक हफ्ते के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी PG हॉस्टलों का निरीक्षण कर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि वे स्वीकृत अनुमति और भवन उपनियमों के अनुरूप हैं या नहीं और इनमें कितने छात्र रह रहे हैं।
हादसे के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी भी जिम्मेदार
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस त्रासदी के लिए इमारत के मालिक ही नहीं, बल्कि MCD और दिल्ली यूनिवर्सिटी भी जिम्मेदार हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की व्यवस्था नहीं होने के कारण देशभर से आने वाले छात्रों को पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
अदालत ने सरकार और यूनिवर्सिटी से हॉस्टल सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि छात्रों की जान को खतरे में डालने वाली व्यवस्था को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
अथॉरिटी की लापरवाही पर कोर्ट की फटकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों ने अपने वैधानिक कर्तव्यों का ठीक से पालन किया होता, तो ऐसे हादसों को टाला जा सकता था। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ पीजी मालिक बेखौफ होकर अवैध निर्माण करते हैं। यह हैरान करने वाला है कि जिन इमारतों का नक्शा सिर्फ दो मंजिलों के लिए पास होता है, उन्हें पुरानी नींव पर ही छह मंजिला तक खड़ा कर दिया जाता है। इसके लिए एक उचित नियामक व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
बचाव कार्य तेज करने के निर्देश
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में अपनी पूरी ताकत झोंक दें ताकि मलबे में दबी जिंदगियों को बचाया जा सके। केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और एमसीडी का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति की सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है और जनहित में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
