'कॉन्फिडेंस चाहिए', जब टीचर ने PM मोदी को दिए पब्लिक में बोलने के टिप्स; प्रधानमंत्री खुद को हंसने से रोक नहीं पाए
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को सिर्फ क्लास तक सीमित न रखते हुए बच्चों के पूरे व्यक्तित्व विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिज्ञासा और रचनात्मकता को बनाए रखना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है।
PM Modi Meets Teachers: शिक्षक दिवस से एक दिन पहले शुक्रवार क प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुने गए शिक्षकों से मुलाकात की। नई दिल्ली स्थित 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के अनुभव सुने और शिक्षा के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। इस दौरान पीएम मोदी का मजाकिया अंदाज भी देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री ने एक टीचर से पब्लिक स्पीकिंग के टिप्स पूछे। टीचर का जवाब सुनकर हॉल में मौजूद हर व्यक्ति हंसने लगा।
PM ने पूछा- अच्छा वक्ता बनने के लिए क्या करूं
दरअसल टीचर्स डे पर पुरस्कार पाने वाले टीचर्स से पीएम मोदी शुक्रवार को संवाद कर रहे थे। चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने सुषमा तमांग की एक शिक्षिका से बातचीत की। सुषमा सिक्किम के PM SHRI Government Senior Secondary School, Dikling में केमिस्ट्री पढ़ाती हैं। उन्होंने बताया कि विषय पढ़ाने के साथ वह विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता, आत्मविश्वास और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने की क्षमता विकसित करने पर भी काम करती हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने टीचर से पूछा कि अगर वह उनके विद्यार्थी हों और उन्हें अच्छा वक्ता बनना हो तो उन्हें क्या करना चाहिए। तमांग ने जवाब दिया कि इसके लिए सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है। इसके बाद मौके पर मौजूद लोग सभी लोग हंसने लगे। टीचर का जवाब सुनकर प्रधानमंत्री भी हंसने लगे।
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पीएम के सामने शिक्षिका भी हुईं नर्वस
फिर पीएम मोदी ने टीचर से पूछा कि आत्मविश्वास कैसे आएगा? इस पर शिक्षिका ने नियमित और लगातार अभ्यास को इसका रास्ता बताया। हालांकि सुषमा तमांग ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के सामने बात करते हुए वह खुद थोड़ी घबरा गई थीं। उन्होंने पीएम से कहा कि उनका औरा ऐसा है कि घबरा गईं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में इसी बात को आगे बढ़ाया और माहौल हल्का हो गया।
'बच्चों के व्यवहार और उनकी प्रतिभा पहचानें'
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि उनका काम केवल किताब और तय पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को बच्चों के इंट्रेस्ट, व्यवहार और उनकी छिपी प्रतिभा को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई बच्चा पढ़ाई में बेहतर नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसमें प्रतिभा नहीं है। हर बच्चे में कोई न कोई विशेष क्षमता हो सकती है, जिसे पहचानकर सही दिशा देना जरूरी है।
स्क्रीन टाइम और नशे पर जताई चिंता
टीचर्स से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम और नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को मोबाइल और स्क्रीन की अत्यधिक निर्भरता से बचाने और उन्हें खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की। साथ ही शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखें और नशे जैसी समस्या के शुरुआती संकेत मिलने पर हस्तक्षेप करें।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को सिर्फ क्लास तक सीमित न रखते हुए बच्चों के पूरे व्यक्तित्व विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिज्ञासा और रचनात्मकता को बनाए रखना भी शिक्षा का अहम हिस्सा है।
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