फर्जी IAS तृप्ति मामले में चौंकाने वाला खुलासा, AI से तैयार करवाए ज्वाइनिंग लेटर; गिरफ्तारी से पहले डिलीट की फाइलें
पुलिस की जांच अब उसके डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे लैपटॉप से गिरफ्तारी से पहले कुछ फाइलें डिलीट किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन फाइलों को रिकवर कराने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि उनमें क्या जानकारी थी और उन्हें क्यों हटाया गया।
MP News: मध्य प्रदेश में गिरफ्तार की गई फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह के मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस को एक और अहम बात पता चली है। पुलिस की जांच में पता चला है कि तृ्प्ति सिंह और उसका भाई सुधांशु नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। लोगों को शक ना हो इसके लिए एआई की मदद से ज्वाइनिंग लेटर भी तैयार करवाते थे। इस तरह दोनों मिलकर लगभग लोगों को लगभग 10 लाख रुपये का चूना भी लगा चुके हैं। मध्य प्रदेश में गिरफ्तार की गई फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह के मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस को एक और अहम बात पता चली है। पुलिस की जांच में पता चला है कि तृ्प्ति सिंह और उसका भाई सुधांशु नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। लोगों को शक ना हो इसके लिए एआई की मदद से ज्वाइनिंग लेटर भी तैयार करवाते थे। इस तरह दोनों मिलकर लगभग लोगों को लगभग 10 लाख रुपये का चूना भी लगा चुके हैं।
गिरफ्तारी से पहले लैपटॉप से कई फाइलें डिलीट की
मध्य प्रदेश में खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने और ठगी के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुलिस की जांच अब उसके डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे लैपटॉप से गिरफ्तारी से पहले कुछ फाइलें डिलीट किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन फाइलों को रिकवर कराने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि उनमें क्या जानकारी थी और उन्हें क्यों हटाया गया।
50 लाख से ज्यादा की ठगी का आरोप
तृप्ति सिंह के खिलाफ अशोकनगर के चंदेरी के अलावा भोपाल में भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार वह खुद को कभी ट्रेनी IAS तो कभी मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाती थी। इसी कथित फर्जी पहचान के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने और पर्यटन विभाग की संपत्तियों को लीज पर दिलाने का भरोसा देकर रकम लेती थी। चंदेरी के मामले में चार युवकों से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप सामने आया है। इसके बाद भोपाल में होटल-रिसॉर्ट लीज और नौकरी दिलाने के नाम पर 39.17 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज हुआ
लैपटॉप से खुल सकते हैं कई राज
पुलिस की नजर अब लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डेटा पर है। जांच अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तारी से पहले लैपटॉप से कई फाइलें हटाई गई थीं। ऐसे में साइबर और फोरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रहे हैं। मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और पैसों के लेनदेन की भी जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि तृप्ति किन लोगों के संपर्क में थी और फर्जीवाड़े में कोई और व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।
पुलिस की तलाशी में भोपाल स्थित ठिकानों से कथित सरकारी पहचान पत्र, लेटरहेड, नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज, ट्रेनी IAS लिखे स्मृति चिह्न और ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा जैसी चीजें मिलने की जानकारी सामने आई थी। जांच में ऐसे लोगों की पहचान भी की जा रही है, जिनसे कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद ली गई।