MP में इंटर्न डॉक्टर्स को हर महीने 21500 रुपये का स्टाइपेंड, डिप्टी CM से हुई चर्चा के बाद बनी सहमति
पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों को लेकर भी सरकार ने गंभीरता दिखाई है। घायल छात्रों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की ओर से पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और घायल साथियों के इलाज की मांग लगातार उठाई जा रही थी।
MP News: मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा के बाद सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने के लिए राजी हो गई है। जानकारी के मुताबिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए प्रतिमाह करने पर सहमति बनी है। अब औपचारिक आदेश जारी होने का इंतजार है।
2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच
वहीं इस फैसले के साथ ही आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे विवाद पर भी सरकार ने कदम उठाया है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए टीम गठित की गई है। इससे पहले पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए गए थे और मामले की जांच DCP स्तर के अधिकारी को सौंपी गई थी।
घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था
पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों को लेकर भी सरकार ने गंभीरता दिखाई है। घायल छात्रों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की ओर से पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और घायल साथियों के इलाज की मांग लगातार उठाई जा रही थी।
सोमवार को मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान वाटर कैनन के इस्तेमाल और लाठीचार्ज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे।
डेढ़ महीने से चल रही थी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे थे। वर्तमान में उन्हें करीब 14,337 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा था। डॉक्टर इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग कर रहे थे। जुलाई में भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन हुआ था। उस समय सरकार की ओर से एक महीने के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन मिलने के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन स्थगित किया था। लेकिन तय समय में लिखित आदेश नहीं आने के बाद सितंबर में फिर आंदोलन शुरू हुआ।
इंटर्न डॉक्टर के धरने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
भोपाल में आंदोलन के दौरान डॉक्टर कमला पार्क और मुख्यमंत्री आवास के आसपास सड़क पर बैठ गए थे। इसके चलते पुराने भोपाल में यातायात प्रभावित हुआ और हमीदिया अस्पताल की नियमित OPD तथा इलेक्टिव OT सेवाओं पर भी असर पड़ा। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से बाहर रखा गया था।
स्टाइपेंड लागू होने की तारीख का ऐलान जल्द
सरकार और डॉक्टर प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद आंदोलन के प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने से गतिरोध खत्म होने की उम्मीद है। डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल डॉक्टरों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के फैसले और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दे सकते हैं। अब सबकी नजर औपचारिक आदेश पर है, जिसमें बढ़े हुए स्टाइपेंड के लागू होने की तारीख समेत अन्य विवरण स्पष्ट होंगे।
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