MP News: 'कोर्ट के सामने ही तोड़े जाते हैं नियम', ट्रैफिक को लेकर हाई कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
निजी वाहनों में हूटर, सायरन, फ्लैश लाइट और अन्य प्रतिबंधित चीजों के इस्तेमाल को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। गलत या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की मौजूदगी को लेकर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई गई। इससे पहले भी हाईकोर्ट ऐसे मामलों में कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की है। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट के सामने ही नियम तोड़े जाते हैं। सरकार की तरफ से जानकारी दी गई थी कि शहर में 660 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और जवान तैनात किए गए हैं। जिस पर हाई कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद बिना नंबर प्लेट और सायरन-हूटर लगी गाड़ियां सड़क पर दौड़ रही हैं।
कोर्ट ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान शहर में लगातार लगने वाले जाम और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कोर्ट के सामने गलत नंबर प्लेट और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के संचालन के साथ-साथ निजी वाहनों में हूटर और सायरन के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया कि जब प्रशासन के पास निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, तो फिर यातायात व्यवस्था में प्रभावी सुधार क्यों नजर नहीं आ रहा। कोर्ट ने भी इस स्थिति पर असंतोष जताते हुए मैदानी स्तर पर कार्रवाई का असर दिखाई देने की जरूरत बताई।
660 CCTV कैमरे, फिर भी नियमों की अनदेखी
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शहर के प्रमुख चौराहों और स्थानों पर करीब 660 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए प्रमुख स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इतनी बड़ी निगरानी व्यवस्था के बावजूद गलत नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट और अन्य गंभीर यातायात उल्लंघनों पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि यदि लगातार निगरानी और चालानी कार्रवाई हो रही है तो सड़क पर इसका परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
'सिर्फ चालान बनाना पर्याप्त नहीं, प्रभाव नजर आना चाहिए'
सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लगातार चालानी कार्रवाई की जा रही है। लेकिन हाईकोर्ट की चिंता केवल चालानों की संख्या तक सीमित नहीं रही। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव सड़कों पर नजर आना चाहिए।
यानी प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि केवल नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे लोग बार-बार नियम तोड़ने से बचें और यातायात सुचारु हो।
हूटर और गलत नंबर प्लेट पर भी सवाल
निजी वाहनों में हूटर, सायरन, फ्लैश लाइट और अन्य प्रतिबंधित चीजों के इस्तेमाल को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। गलत या बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों की मौजूदगी को लेकर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई गई। इससे पहले भी हाईकोर्ट ऐसे मामलों में कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
सुनवाई में भारी वाहनों के शहर में प्रवेश का मुद्दा भी सामने आया। अदालत के समक्ष यह सवाल रखा गया कि शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की क्या व्यवस्था है।
28 सितंबर वाले सप्ताह में अगली सुनवाई
मामले में सरकार को यातायात व्यवस्था और की गई कार्रवाई से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने के लिए जवाब देना है। रिपोर्टों के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर वाले सप्ताह में होगी।
हाईकोर्ट की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब इंदौर में ट्रैफिक नियमों को लेकर पुलिस ने कार्रवाई भी तेज की है। हाल के दिनों में रॉन्ग साइड ड्राइविंग जैसे मामलों में चालान के बजाय FIR दर्ज करने की कार्रवाई भी शुरू हुई है।
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