पीड़ित परिवार को देने होंगे एक करोड़ 90 लाख, कंज्यूमर फोरम का बीमा कंपनी को आदेश, पहले झूठा बताकर किया था रिजेक्ट
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 24 फरवरी 2025 को क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी की ओर से दुर्घटना के समय अमन की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। कंपनी का तर्क था कि यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे के वक्त अमन वाहन चला रहा था या कार में दूसरी जगह बैठा था।
MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले में बीमा क्लेम से जुड़े एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमाधारक के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पॉलिसी के तहत 1 करोड़ 90 लाख रुपये की दावा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। मामला एक सड़क दुर्घटना में युवा व्यापारी की मौत के बाद सामने आया था।
हादसे में हुई थी अमन जाट की मौत
मामला गुना की हनुमान कॉलोनी निवासी हरिसिंह जाट के बेटे अमन जाट से जुड़ा है। अमन ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस से पॉलिसी ली थी। इसमें सामान्य जीवन बीमा के लिए एक करोड़ रुपये और दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में 1.90 करोड़ रुपये का रिस्क कवर निर्धारित था। पॉलिसी में अमन ने अपने पिता हरिसिंह जाट को नॉमिनी बनाया था।
11 सितंबर 2024 को अमन की कार सड़क हादसे का शिकार हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर के बाद घायल अमन को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बेटे की मौत के बाद पिता ने बीमा कंपनी के सामने पॉलिसी के मुताबिक 1.90 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा पेश किया।
जांच रिपोर्ट में दस्तावेज सही पाए गए
क्लेम की जांच के लिए बीमा कंपनी ने एक निजी जांच एजेंसी की मदद ली। जांच में पुलिस पंचनामा, मृत्यु प्रमाण पत्र समेत संबंधित दस्तावेजों को सही पाया गया और दावा स्वीकार किए जाने की सिफारिश की गई थी।
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 24 फरवरी 2025 को क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी की ओर से दुर्घटना के समय अमन की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। कंपनी का तर्क था कि यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे के वक्त अमन वाहन चला रहा था या कार में दूसरी जगह बैठा था। इसके आधार पर पॉलिसी को भी रद्द कर दिया गया और परिवार पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए।
परिवार ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया
बीमा कंपनी के फैसले से असहमति जताते हुए हरिसिंह जाट ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करने के आधार को स्वीकार नहीं किया।
आयोग की अध्यक्षता सुरेश कुमार चौबे और महिला सदस्य शबीना अली की पीठ ने की। आयोग ने कंपनी की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में माना।
परिवार को मिलेगी पूरी बीमा राशि
फैसले में आयोग ने बीमा कंपनी को पॉलिसी की शर्तों के अनुसार परिवादी को 1 करोड़ 90 लाख रुपये की बीमा दावा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले को ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां बीमा कंपनियों और पॉलिसीधारकों के बीच क्लेम को लेकर विवाद सामने आते हैं।
गुना का यह मामला यह भी बताता है कि बीमा कंपनी की ओर से क्लेम अस्वीकार किए जाने के बाद उपभोक्ता के पास कानूनी और उपभोक्ता आयोग के माध्यम से राहत मांगने का रास्ता मौजूद रहता है।
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