एमपी डकैती एक्ट पर हाई कोर्ट में सुनवाई, सरकार और अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी
पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह की एमपी डकैती एक्ट को खत्म करने की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।

MP News: मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने 1981 में बने ‘मध्यप्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम’ को खत्म करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव और डीजीपी समेत 11 पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पूर्वमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने दायर की याचिका
यह याचिका पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1981 में जब चंबल के बीहड़ों में डकैतों का आतंक था, तब यह कानून जरूरी था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। सरकार खुद विधानसभा में स्वीकार कर चुकी है कि वर्ष 2007 के बाद प्रदेश में कोई नया सूचीबद्ध डकैत नहीं बना और वर्तमान में कोई गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद इस कानून के तहत धारा 11 और 13 का इस्तेमाल आम आपराधिक मामलों में भी किया जा रहा है।
1981 में बना था एमपी डकैती एक्ट
याचिका में कहा गया है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में डकैत गिरोहों की सक्रियता को देखते हुए वर्ष 1981 में यह कानून बनाया गया था। हालांकि, वर्तमान समय में क्षेत्र से बड़े डकैत गिरोहों का लगभग सफाया हो चुका है, इसके बावजूद यह कानून अब भी प्रभावी है।
प्रमुख सचिव और DGP समेत 11 को नोटिस
हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव, DGP समेत कुल 11 पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत के सामने अब सरकार और पुलिस विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस कानून की आवश्यकता क्यों बनी हुई है और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
ग्वालियर-चंबल के सात जिलों के SP भी पक्षकार
मामले में ग्वालियर-चंबल अंचल के सात जिलों के SP को भी पक्षकार बनाया गया है। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से इस कानून और इसके मौजूदा इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा है।
डकैती एक्ट की FIR को लेकर उठाए सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया है कि डकैत गिरोहों के खत्म होने के बावजूद ग्वालियर-चंबल अंचल में कई मामलों में इस कानून के तहत FIR दर्ज की जा रही हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मामूली घटनाओं में भी डकैती एक्ट की धाराएं लगाए जाने से आम लोगों और कई निर्दोष लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
4 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। अब इस याचिका पर चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी। उस दौरान सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
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