MP News: इंटर्न डॉक्टर्स का धरना दूसरे दिन जारी, अब सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन में उतरे; स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बदहाल
आंदोलन का सीधा प्रभाव सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के काम बंद करने के बाद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में OPD सेवाएं प्रभावित हुईं।
MP News: गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल से शुरू हुआ विरोध प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गया है। भोपाल में कमला पार्क के सामने इंटर्न डॉक्टर का धरना लगातार दूसरे दिन जारी है। जूनियर डॉक्टरों के बाद सीनयिर रेजिडेंट्स भी अब आंदोलन में उतर आए हैं। इसके कारण सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य्य व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग पर अड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद अब तक सरकार ने फैसला नहीं लिया है, जब तक मांगे नहीं मानी जाती हैं, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
OPD और अस्पताल की व्यवस्था पर असर
आंदोलन का सीधा प्रभाव सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के काम बंद करने के बाद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में OPD सेवाएं प्रभावित हुईं। मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ वैकल्पिक सर्जरी भी टालनी पड़ीं। इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की कोशिश की गई।
इसी बीच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) भी इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में सामने आया है। संगठन ने सरकार को मांगों पर समाधान के लिए समय दिया है और चेतावनी दी है कि बात नहीं बनी तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को और परेशानी होने की आशंका है।
ट्रैफिक पर भी पड़ा असर
भोपाल में डॉक्टरों के प्रदर्शन का असर अस्पताल परिसर के बाहर यातायात पर भी दिखाई दिया। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जुटे डॉक्टरों के कारण कमला पार्क से रेतघाट तक यातायात प्रभावित हुआ और कई इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फिलहाल इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर कायम हैं। दूसरी ओर प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि आंदोलन का समाधान निकालने के साथ अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुचारु रखा जाए।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक वर्तमान में उन्हें करीब 14,337 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। उनकी मांग है कि इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का तर्क है कि मेडिकल इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पतालों में नियमित रूप से मरीजों की देखभाल और चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े काम करने पड़ते हैं। ऐसे में मौजूदा राशि उनकी जिम्मेदारियों और काम के अनुपात में पर्याप्त नहीं है।
आश्वासन देने के बाद भी मांग नहीं मानी
डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पहले भी आंदोलन किया गया था। उस दौरान मांग पर विचार करने और जल्द निर्णय का भरोसा दिया गया था। अब तय समय निकल जाने के बाद भी जब स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं हुई तो इंटर्न डॉक्टर दोबारा आंदोलन की राह पर आ गए।
भोपाल में प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश भी की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा गया। पुलिस ने अब पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश भी दिए हैं।
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