'बंडा दर्द सुनने जा रहे, या न्याय दिलाने', सागर में CM के दौरे पर उमंग सिंघार ने पूछे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि बंडा और सागर के प्रभावित परिवारों को न्याय मिले, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और जहरीली शराब की सप्लाई के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए।
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MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बंडा दौरे से पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। सिंघार ने मुख्यमंत्री से कहा कि वे बंडा जाकर केवल पीड़ित परिवारों का दर्द न सुनें, बल्कि उन्हें न्याय दिलाने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में भी कदम उठाएं।
आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
उमंग सिंघार ने अपने बयान में आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दीपक सक्सेना, सागर के एसपी अनुराग सुजानिया और सहायक आबकारी आयुक्त जबलपुर संजीव दुबे का उल्लेख करते हुए पूछा कि इनके खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जहरीली शराब की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
‘ऐसी दोस्ती किस काम की, जो लोगों की जान से बड़ी हो जाए’
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी से व्यक्तिगत संबंध हैं, तो भी जनता की जान के मामले में कार्रवाई से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या सरकार अधिकारियों पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगी या फिर राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को प्राथमिकता दी जाएगी। सिंघार ने आगे कहा कि मैं समझता हूं कि दीपक सक्सेना जी शायद आपके कॉलेज के साथ के मित्र हैं। आप उनको हटाने का प्रयास नहीं करेंगे। लेकिन एसी दोस्ती किस काम की है, जो जहरीली शराब के कारण आम लोगों की मोते हो रही हैं। आम लोग मर रहे हैं, क्या ऐसी दोस्ती आप निभाएंगे?
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि बंडा और सागर के प्रभावित परिवारों को न्याय मिले, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और जहरीली शराब की सप्लाई के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए। सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री का बंडा दौरा तभी सार्थक होगा, जब पीड़ित परिवारों को भरोसा मिले कि सरकार उनके साथ खड़ी है और इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी।
बंडा में कैसे सामने आया शराब कांड?
सागर जिले के बंडा क्षेत्र के बराज, नौरोजा, घूघरा खुर्द और आसपास के गांवों में सितंबर की शुरुआत में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ी। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। शुरुआती जांच में शराब में जहरीले रसायन, विशेषकर मेथेनॉल, की आशंका सामने आई। बाद की रिपोर्ट्स में भी मेथाइल अल्कोहल विषाक्तता का उल्लेख किया गया है।
मामले की जांच में कथित नकली शराब की सप्लाई का नेटवर्क सामने आने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। जांच एजेंसियां शराब की खरीद, निर्माण और वितरण की पूरी कड़ी खंगाल रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़े नेटवर्क की आशंका भी सामने आई है।
आबकारी विभाग की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आई है। रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध शराब के स्टॉक को लेकर विभाग के स्तर पर जारी निर्देशों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि विभाग की ओर से पहले संदिग्ध स्टॉक की बिक्री रोकने, उसे जब्त करने और जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए गए, लेकिन कुछ ही समय बाद कार्रवाई को लेकर अलग निर्देश जारी हुए।
घटना के बाद सरकार ने अधिकारियों पर भी कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया और एक अधिकारी को मुख्यालय अटैच किया गया। इसके बाद बंडा की एसडीएम आरती यादव और एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को भी उनके पद से हटाया गया।
30 आरोपियों पर केस, 14 गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए करीब 30 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें से 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है।
सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से इससे अधिक मुआवजे और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
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