UCC पर NDA में घमासान: TDP, शिवसेना और HAM समर्थन में, JDU बोला- बिहार में लागू नहीं होने देंगे
UCC पर NDA में मतभेद सामने आए, TDP, शिवसेना और HAM समर्थन में हैं, जबकि JDU ने बिहार में लागू नहीं होने की बात कही।
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समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के भीतर ही अलग-अलग सुर सुनाई देने लगे हैं। एक तरफ तेलुगु देशम पार्टी (TDP), शिंदे गुट की शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने UCC के समर्थन की बात कही है, तो दूसरी तरफ बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने साफ कर दिया है कि राज्य में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा। अब सवाल उठ रहा है कि जब NDA के भीतर ही इस मुद्दे पर एकमत नहीं है, तब देश के 21 राज्यों में UCC लागू करने का रास्ता कितना आसान रहता है।
अमित शाह ने 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC का लक्ष्य बताया
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। फिलहाल देश में 22 राज्यों में NDA की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC लागू है। ऐसे में बाकी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य बताया गया है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC से जुड़ा बिल पास हो चुका है। अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार है।
TDP बोली- UCC का समर्थन करेंगे, लेकिन सबकी बात सुननी होगी
UCC को लेकर तेलुगु देशम पार्टी ने समर्थन का रुख अपनाया है। लोकसभा में TDP नेता लावू कृष्ण देवरायुलु ने कहा कि उनकी पार्टी UCC का समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत जरूरी है। यानी समर्थन है, लेकिन बात-विचार करके ही आगे बढ़ने की बात कही गई है।
गौर करने वाली बात यह है कि TDP पहले UCC को लेकर अलग रुख रख चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद TDP के NDA में आने से पहले चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि UCC के मुद्दे पर पार्टी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी। अब बदले राजनीतिक समीकरण में पार्टी के रुख में बदलाव चर्चा का विषय बन गया है।
JDU का दो टूक रुख- देश में समर्थन, बिहार में लागू नहीं होने देंगे
अब आइए बिहार पर, जहां मामला थोड़ा अलग दिख रहा है। JDU नेता श्याम रजक ने कहा है कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी। उनका कहना है कि पार्टी अपने इस रुख पर कायम है। JDU नेता संजय झा के अमित शाह से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेताओं की बातचीत के बाद बिहार को लेकर क्या रास्ता निकलता है।
महाराष्ट्र, बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी शुरू हुई तैयारी
UCC को लेकर कई अन्य राज्यों में भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने समान नागरिक संहिता को लेकर कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में UCC लागू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। हालांकि, भाजपा की सहयोगी NCPI ने अभी अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है और प्रस्ताव आने के बाद इस पर चर्चा करने की बात कही है।
शिवसेना और HAM ने किया अमित शाह के बयान का स्वागत
NDA के भीतर दो और सहयोगी दलों ने UCC को समर्थन दिया है। शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे ने समान नागरिक संहिता को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हुए इसका समर्थन किया। वहीं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत किया और UCC के समर्थन की बात कही।
इस तरह NDA के कुछ सहयोगी दल जहां खुलकर सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं JDU का बिहार वाला रुख पूरे मामले को अलग दिशा दे रहा है।
उमर अब्दुल्ला बोले- NDA के सभी दल UCC पर सहमत नहीं
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी UCC को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के पास संसद में UCC बिल पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या है तो उसे संसद में बिल पेश करना चाहिए। अलग-अलग राज्यों के जरिए इसे लागू करने की कोशिश क्यों की जा रही है।
उमर अब्दुल्ला का कहना है कि NDA के सभी दल UCC के मुद्दे पर सहमत नहीं हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब NDA के ही सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं।
केरल की मुस्लिम संस्था ने भी UCC का विरोध किया
दूसरी ओर, केरल की मुस्लिम संस्था समस्त केरल जेम-इयातुल उलमा भी UCC का विरोध कर रही है। संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद जिफ्री का कहना है कि केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय भी यूनिवर्सल सिविल कोड को स्वीकार नहीं कर पाएंगे। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय में शादी, तलाक और विरासत से जुड़े नियम धर्म का हिस्सा हैं और इनके लिए धार्मिक आधार पर नियम-कायदे निर्धारित हैं। संस्था का तर्क है कि UCC लागू होने से इन धार्मिक व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
21 राज्यों में UCC का लक्ष्य, लेकिन राह में कई सवाल
कुल मिलाकर UCC को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। केंद्र सरकार इसे 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में लागू करने का लक्ष्य बता रही है। कुछ सहयोगी दल इसके समर्थन में हैं, लेकिन JDU का बिहार को लेकर अलग रुख सामने आ चुका है। वहीं विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों की ओर से भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।
अब असली सवाल यही है कि क्या UCC NDA के भीतर सभी दलों को एक मंच पर ला पाएगा, या राज्यों के अलग-अलग रुख से मामला और उलझेगा? आने वाले दिनों में अमित शाह और NDA के सहयोगी दलों के बीच होने वाली बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।



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