इंजीनियर डे पर CM मोहन यादव ने विश्वेश्वरैया को किया याद; कहा- प्राचीन विरासत को आधुनिक सिस्टम से जोड़ने की जरूरत
सीएम मोहन यादव ने भारत की प्राचीन स्थापत्य परंपरा और निर्माण तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि देश की ऐतिहासिक विरासत इस बात का प्रमाण है कि भारत में सदियों पहले भी इंजीनियरिंग का उच्च स्तर मौजूद था।
MP News: आज देश इंजीनियर डे मना रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी इंजीनियर्स को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महान इंजीनयर और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के निर्माण और विकास में इंजीनियरों की भूमिका केवल तकनीकी काम तक सीमित नहीं है। लोक निर्माण से लेकर लोक कल्याण तक अभियंता समाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वेश्वरैया ने अपनी प्रतिभा और कार्यों से देश के अभियंताओं को नई पहचान दिलाई। उनके योगदान से यह संदेश मिलता है कि तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल समाज और राष्ट्र के विकास के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के अभियंताओं से भी आधुनिक तकनीक और अपनी जिम्मेदारी के बीच बेहतर तालमेल बनाकर काम करने की अपील की।
प्राचीन भारत की इंजीनियरिंग का किया उल्लेख
सीएम मोहन यादव ने भारत की प्राचीन स्थापत्य परंपरा और निर्माण तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि देश की ऐतिहासिक विरासत इस बात का प्रमाण है कि भारत में सदियों पहले भी इंजीनियरिंग का उच्च स्तर मौजूद था। चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिर, जल संरचनाएं और विशाल स्थापत्य आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं।
उन्होंने मंदसौर और विदिशा के प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य कला का उल्लेख करते हुए कहा कि इन ऐतिहासिक निर्माणों में उस समय की तकनीकी समझ, योजना और दूरदृष्टि दिखाई देती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्राचीन भारत में तैयार की गई कई संरचनाएं आज के इंजीनियरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में निर्माण कार्यों की गति बढ़ी है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी। जल स्रोतों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखकर ही परियोजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने नर्मदा समेत प्रदेश की दूसरी नदियों के संरक्षण पर भी जोर दिया।
राजा भोज और विक्रमादित्य की विरासत से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के इतिहास का जिक्र करते हुए राजा भोज और विक्रमादित्य के शासनकाल में हुए निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं को भी याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर की योजनाओं में जनहित, जल प्रबंधन और सुव्यवस्थित निर्माण की सोच दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राचीन विरासत को आधुनिक तकनीक और वर्तमान जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ने की जरूरत है। ऐतिहासिक ज्ञान और आधुनिक इंजीनियरिंग का समन्वय भविष्य के विकास को अधिक टिकाऊ बना सकता है।
मुख्यमंत्री ने अभियंताओं से आत्मविश्वास के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया में नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और युवाओं को पूरी क्षमता के साथ काम करना होगा। अभियंता दिवस पर उन्होंने प्रदेश के सभी अभियंताओं को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना की।



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