MP में OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का अहम फैसला: 14% ही रहेगा OBC रिजर्वेशन, 13% अनारक्षित पदों पर तीन महीने में नियुक्ति के निर्देश
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए 14% आरक्षण को बरकरार रखा है। अदालत ने 27% आरक्षण के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
MP OBC Reservation: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आरक्षण की सीमा और नियुक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में OBC वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा, लेकिन इसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का पर्याप्त आधार नहीं है। साथ ही, 29 सितंबर 2022 के बाद की भर्तियों में शेष 13 प्रतिशत पदों को अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से भरने के निर्देश दिए गए हैं।
14 प्रतिशत से 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान
अदालत के अनुसार, मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 के अध्यादेश और संशोधन अधिनियम के माध्यम से सरकारी सेवाओं में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, उच्च शिक्षा और लोक सेवाओं से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अदालत ने माना कि OBC वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है।
आरक्षण बढ़ाने के लिए असाधारण परिस्थितियां आवश्यक
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला आरक्षण देने का नहीं, बल्कि आरक्षण की सीमा तय करने का है। अदालत के मुताबिक, OBC वर्ग 14 प्रतिशत आरक्षण का हकदार है, लेकिन इसे 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियां साबित नहीं हुई हैं। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल मामलों का उल्लेख करते हुए 50 प्रतिशत आरक्षण की निर्धारित सीमा का पालन करने की बात कही गई है।
29 सितंबर 2022 तक की नियुक्तियों को राहत
फैसले में कहा गया है कि मार्च 2019 से 29 सितंबर 2022 तक संशोधन अधिनियम के तहत 14 प्रतिशत से अधिक और 27 प्रतिशत तक आरक्षण के आधार पर नियुक्त किए गए OBC अभ्यर्थियों की नौकरियां सुरक्षित रहेंगी। उन्हें सेवा से नहीं हटाया जाएगा। इन नियुक्तियों से संबंधित पदों का आगामी तीन भर्ती चक्रों में समायोजन किया जाएगा।
इसके बाद की भर्तियों में 87 प्रतिशत पदों पर ही नियुक्ति
अदालत ने निर्देश दिया कि 29 सितंबर 2022 के बाद की नियुक्तियां 87 प्रतिशत पदों के दायरे में की जाएंगी। शेष 13 प्रतिशत पद अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से भरे जाएंगे, ताकि कुल पदों की संख्या 100 प्रतिशत पूरी हो सके।
तीन महीने में 13 प्रतिशत पद भरने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल सहित सभी भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे तीन महीने की अधिकतम समय-सीमा में 13 प्रतिशत अनारक्षित पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करें।
अदालत ने इन निर्देशों के साथ संबंधित सभी याचिकाओं का निराकरण कर दिया।