चंबल में रेत माफिया से निपटने के लिए AI की मदद, MP-राजस्थान की पुलिस मिलकर करेंगी काम
तकनीकी साधनों का इस्तेमाल रेत के अवैध उत्खनन के साथ-साथ नदी से रेत लेकर निकलने वाले वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।
MP News: चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान अब तकनीक का सहारा ले रहे हैं। मुरैना जिले में वन विभाग ने राजघाट के पास रिठौरा घाट पर AI कैमरे लगाए हैं। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है। राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र में भी वन विभाग AI आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू करने की तैयारी में है। दोनों राज्यों की सीमा से लगे चंबल क्षेत्र और नेशनल हाईवे-44 के आसपास निगरानी बढ़ाने की योजना है।
फिलहाल रिठौरा घाट पर दो AI कैमरे लगाए गए हैं। क्षेत्रफल बड़ा होने और कई घाटों पर अवैध गतिविधियों की आशंका को देखते हुए मुरैना वन विभाग ने दो अतिरिक्त ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा है। इन तकनीकी साधनों का इस्तेमाल रेत के अवैध उत्खनन के साथ-साथ नदी से रेत लेकर निकलने वाले वाहनों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।
SP और DFO ने ड्रोन से किया इलाके का निरीक्षण
मुरैना के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना और चंबल घड़ियाल अभयारण्य के DFO हरीश चंद्र बघेल ने राजघाट पहुंचकर नदी और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान ड्रोन उड़ाकर संवेदनशील स्थानों को देखा गया। अधिकारियों के मुताबिक निरीक्षण के समय अवैध रेत उत्खनन से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई नहीं दी। मौके पर वाहनों की आवाजाही या रेत परिवहन के ताजा टायरों के निशान भी नहीं मिले। एसपी ने राजघाट पर तैनात सुरक्षा बलों को ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने संवेदनशील घाटों पर गश्त बढ़ाने और रात के समय भी निगरानी जारी रखने पर जोर दिया।
धर्मराज मीना ने बताया कि जिन इलाकों में पहले रेत उत्खनन की गतिविधियां सामने आती थीं, वहां फिलहाल स्थिति शांत है। प्रशासन की कोशिश है कि इन क्षेत्रों में दोबारा अवैध गतिविधियां शुरू न हों। इसके लिए सुरक्षा बलों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।
437 किलोमीटर क्षेत्र में निगरानी बड़ी चुनौती
DFO हरीश चंद्र बघेल के मुताबिक चंबल अभयारण्य का क्षेत्र करीब 437 किलोमीटर में फैला है। इतने बड़े इलाके में हर समय जमीन पर कर्मचारियों की मदद से निगरानी करना आसान नहीं है। ऐसे में सबसे ज्यादा संवेदनशील घाटों और उन स्थानों को तकनीक के जरिए निगरानी में रखा जाएगा, जहां अवैध रेत उत्खनन की संभावना ज्यादा है।
SAF, वन विभाग और जिला टास्क फोर्स की रात्रि गश्त भी बढ़ाई गई है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और एसपी धर्मराज मीना के समन्वय से संयुक्त टीम कार्रवाई कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन अलर्ट
चंबल में अवैध रेत खनन का मामला अब सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 2026 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को चंबल क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेशों में संवेदनशील नदी क्षेत्रों और अवैध खनन के रास्तों पर हाई-रेजोल्यूशन CCTV लगाने, वाहनों की GPS ट्रैकिंग और संयुक्त गश्त जैसे कदम शामिल हैं।
जुलाई 2026 के आदेश में भी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जानकारी सामने आई। मध्य प्रदेश ने कई रणनीतिक स्थानों पर CCTV के साथ ड्रोन और अन्य कैमरा आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू की है। वहीं राजस्थान ने भी कई स्थानों पर CCTV नेटवर्क विकसित किया है। नेशनल हाईवे-44 पर मुरैना-धौलपुर पुल के आसपास निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की योजना भी सामने आई है।
दोनों किनारों पर AI कैमरे, ड्रोन, CCTV
चंबल के दोनों किनारों पर AI कैमरे, ड्रोन, CCTV और रात्रि गश्त को जोड़कर निगरानी का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ अवैध रेत उत्खनन पकड़ना नहीं, बल्कि रेत माफिया की गतिविधियों को पहले ही रोकना भी है।
अधिकारियों ने बताया कि एसएएफ, वन विभाग और जिला टास्क फोर्स द्वारा रात्रि गश्त भी बढ़ाई गई है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और एसपी धर्मराज मीना के सहयोग से संयुक्त टास्क फोर्स सक्रियता के साथ कार्रवाई कर रही है। अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए आगे भी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।
दोनों राज्य मिलकर करेंगे निगरानी
चंबल नदी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के वन विभाग समन्वय के साथ निगरानी व्यवस्था विकसित करेंगे। मुरैना की ओर AI कैमरे लगाए गए हैं, जबकि धौलपुर की ओर भी कैमरे लगाने की योजना है। ड्रोन और AI कैमरों के साथ रात्रि गश्त बढ़ने से नदी क्षेत्र और उससे जुड़े रास्तों पर निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
