ग्वालियर में बनेगा एशिया का पहला टेलीफोन मैन्युफैक्चरिंग जोन, 5500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव, अमित शाह करेंगे भूमिपूजन
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 18 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसका मकसद ग्वालियर में सिर्फ कुछ फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ा पूरा औद्योगिक नेटवर्क तैयार करना है।
MP News: मध्य प्रदेश का ग्वालियर जल्द ही देश के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बड़े केंद्र के रूप में सामने आ सकता है। यहां एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 अक्टूबर 2026 को इस परियोजना का भूमिपूजन करेंगे। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निमंत्रण को अमित शाह ने स्वीकार कर लिया है। इस कार्यक्रम में TMZ में निवेश करने वाली 24 से ज्यादा वैश्विक कंपनियां भी अपने प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन करेंगी।
5500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
यह परियोजना ग्वालियर के श्रीमंत माधवराव सिंधिया काउंटर मैग्नेट सिटी (SADA) में विकसित की जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस जोन में अब तक 5,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 18 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। इसका मकसद ग्वालियर में सिर्फ कुछ फैक्ट्रियां लगाना नहीं, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ा पूरा औद्योगिक नेटवर्क तैयार करना है।
170 एकड़ जमीन पर तैयार होगा जोन
प्रस्तावित TMZ के लिए करीब 170 एकड़ जमीन की योजना बनाई गई है। इसमें SADA क्षेत्र में लगभग 90 एकड़ और IT Park क्षेत्र में करीब 70 एकड़ जमीन शामिल है। मध्य प्रदेश सरकार ने यह जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध कराई है।
इस परियोजना के पहले चरण के बुनियादी ढांचे के लिए केंद्र सरकार करीब 493 करोड़ रुपये की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। परियोजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी वाला एक स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी SPV भी बनाया गया है। इसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
लीकॉम जोन में क्या बनाया जाएगा?
TMZ को एक Plug-and-Play मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। इससे उन्हें उत्पादन शुरू करने में कम समय लगेगा। यहां टेलीकॉम उपकरणों और उनके कंपोनेंट्स के निर्माण के साथ डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, टेस्टिंग और नई तकनीक पर काम किया जाएगा। ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर, 5G और 6G से जुड़े उद्योगों को भी इस इकोसिस्टम में जगह मिलने की उम्मीद है।
जुलाई में हुआ था समझौता
ग्वालियर TMZ की दिशा में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के बीच जुलाई 2026 में समझौता हुआ था। इसके बाद परियोजना के लिए जमीन, निवेश और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम किया गया। सितंबर में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण भी किया था। उस समय उन्होंने बताया था कि 24 कंपनियों ने करीब 5,500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है।
टेलीकॉम उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा
सरकार ने बताया कि इस परियोजना से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। साथ ही टेलीकॉम उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और भारत की आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
अमित शाह की मौजूदगी में होने वाला भूमिपूजन इस परियोजना के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है। 29 अक्टूबर के कार्यक्रम के बाद ग्वालियर में टेलीकॉम कंपनियों के निवेश और निर्माण गतिविधियों को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।
