पन्ना टाइगर रिजर्व का आधा हिस्सा डूब जाएगा! केन-बेतवा लिंक परियोजना में 60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा, HC ने मांगी रिपोर्ट
याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि आंदोलन कर रहे आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों पर प्रशासन की ओर से दबाव बनाया गया।
MP News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने रिपोर्ट में बताई गई कथित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में परियोजना को लेकर चल रही कार्यवाही और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। याचिका में दावा किया गया है कि योजना में 60 लाख पेड़ काटे जाएंगे और पन्ना टाइगर रिजर्व का आधा हिस्सा डूब सकता है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
पन्ना टाइगर रिजर्व का आधा हिस्सा हो सकता है प्रभावित
चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने ये निर्देश दिए। जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने जनहित याचिका दायर की है और गुरुवार को खुद कोर्ट में अपना पक्ष रखा। याचिका में दावा किया गया है कि परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है और लाखों पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
पन्ना टाइगर रिजर्व और घड़ियाल अभयारण्य पर चिंता
याचिका के अनुसार, परियोजना के लिए बनने वाले बांध और जलाशय के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगलों का बड़ा हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है। इससे बाघ, तेंदुए, गिद्ध और दूसरे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने के साथ उनके आने-जाने के रास्ते भी टूट सकते हैं।
याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर पड़ने वाले संभावित असर का मुद्दा भी उठाया गया है। आरोप है कि वन्यजीव संबंधी मंजूरी देते समय डाउनस्ट्रीम यानी बांध से आगे के क्षेत्र में घड़ियालों पर पड़ने वाले प्रभाव का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने इस विषय में स्वतंत्र और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की है।
60 लाख पेड़ों की कटाई का दावा
याचिका में वन सलाहकार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए करीब 60 लाख पेड़ काटे जाने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जंगलों के बड़े पैमाने पर नुकसान से बुंदेलखंड के पर्यावरण, स्थानीय जलवायु और वर्षा चक्र पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, पेड़ों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। परियोजना से जुड़े पुराने पर्यावरणीय दस्तावेजों और CEC रिपोर्ट पर आधारित एक अन्य अध्ययन में 20 सेंटीमीटर या उससे अधिक मोटाई वाले करीब 23 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान बताया गया था।
पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट पर भी सवाल
याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि रिपोर्ट में कुछ तथ्यात्मक कमियां थीं और केन नदी के पानी की उपलब्धता और परियोजना के प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कराने की जरूरत को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
केंद्र सरकार के अनुसार CEC ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर परियोजना की वन्यजीव मंजूरी की जांच की थी और 30 अगस्त 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। बाद में परियोजना से जुड़ी एजेंसी ने इन चिंताओं पर अपना जवाब दिया था।
आदिवासियों के विरोध का भी जिक्र
याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में चल रहे आंदोलन का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि आंदोलन कर रहे आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों पर प्रशासन की ओर से दबाव बनाया गया। राशन-पानी की आपूर्ति रोकने और गांवों में आवाजाही सीमित करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है परियोजना का उद्देश्य
केन-बेतवा लिंक परियोजना की परिकल्पना 1980 के दशक में की गई थी। इसका उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी के बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित इलाकों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में परियोजना के वित्त पोषण और क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से CEC की रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और राज्य सरकार की कार्रवाई का विवरण मांगा है। 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में इन सवालों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली जानकारी अहम होगी।