हेमकुंड साहिब में सीजन की तीसरी बर्फबारी, कल बंद होंगे कपाट; बद्रीनाथ तक पहाड़ 'बर्फ की चादर' से ढके
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल अब तक 3.75 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंच चुके हैं। पिछले साल करीब 2.86 लाख श्रद्धालुओं ने यहां दर्शन किए थे।
Hemkund Sahib Kapat: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब में इस सीजन की तीसरी बर्फबारी हुई है। देर रात मौसम बदलने के बाद यहां बर्फ गिरने से आसपास की पहाड़ियों का नजारा बदल गया। ऊंचाई वाले इस इलाके में ठंड बढ़ गई है। खास बात यह है कि बर्फबारी ऐसे समय हुई है, जब इस साल की तीर्थयात्रा समाप्त होने वाली है। हेमकुड साहिब से लेकर बद्रीनाथ धाम तक पहाड़ बर्फ की चादर से ढक गए हैं। ठंड बढ़ने के साथ ही बेहद खूबसूरत नजारा दिखाई दे रहा है। गुरुद्वारे के कपाट 10 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
हर साल गर्मियों में शुरू होती है यात्रा
हेमकुंड साहिब में हर साल गर्मियों के दौरान यात्रा शुरू होती है। सर्दियों में भारी बर्फबारी और कठिन मौसम के कारण यहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से गुरुद्वारे के कपाट कुछ महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। अगले यात्रा सीजन में मौसम अनुकूल होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दोबारा दर्शन शुरू होते हैं।
23 मई को खुले थे कपाट
इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद से देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंचे। यात्रा के अंतिम दिनों में भी श्रद्धालुओं का उत्साह बना हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल अब तक 3.75 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंच चुके हैं। पिछले साल करीब 2.86 लाख श्रद्धालुओं ने यहां दर्शन किए थे। इस तरह इस बार यात्रा में आने वाले लोगों की संख्या में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
10 अक्टूबर को होगी अंतिम अरदास
गुरुद्वारे के कपाट बंद करने से पहले विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को सुबह सुखमणी साहिब का पाठ और शब्द कीर्तन होगा। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे यात्रा सीजन की अंतिम अरदास की जाएगी।
कार्यक्रम में सेना के बैंड की धुनों के बीच गुरु ग्रंथ साहिब को सम्मान के साथ सचखंड में सुशोभित किया जाएगा। गुरुद्वारे को फूलों और रोशनी से सजाने की तैयारियां भी की जा रही हैं। इस अवसर पर यात्रा के दौरान सहयोग देने वाले लोगों और अधिकारियों का आभार जताया जाएगा।
दर्शन के लिए अगले साल तक करना होगा इंतजार
हेमकुंड साहिब समुद्र तल से लगभग 4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां चारों ओर ऊंची पहाड़ियां और एक हिमनदी झील है। इसकी ऊंचाई के कारण मौसम में तेजी से बदलाव होता है। बारिश और बर्फबारी से तापमान गिर जाता है और रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है। यात्रा मार्ग पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। बर्फबारी के दौरान पैदल चलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की सलाह का पालन करना चाहिए।
हेमकुंड साहिब की यह बर्फबारी इस साल की यात्रा के अंतिम दौर में हुई है। 10 अक्टूबर को कपाट बंद होने के साथ ही यहां नियमित दर्शन का सिलसिला सर्दियों के लिए थम जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को अगले यात्रा सीजन का इंतजार करना होगा।



