‘हूती आंदोलन भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ’; अबू रास का बड़ा बयान, सऊदी को लेकर दी चेतावनी
यमन में हूती-सऊदी संघर्ष के बीच हूतियों ने पाकिस्तान और तुर्की को सऊदी अरब से दूर रहने की चेतावनी दी है।

Yemen Says Attacks On India: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब हूती नेतृत्व ने पाकिस्तान और तुर्की को लेकर अपना रुख साफ किया है। हूती सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री अब्दुलवाहिद अबू रास ने पाकिस्तान और तुर्की से सऊदी अरब के साथ सैन्य सहयोग से दूर रहने को कहा है। उनके बयान में खास तौर पर पाकिस्तान के साथ हूतियों के पुराने संबंधों और भारत-पाकिस्तान तनाव का जिक्र सामने आया है।
हूती आंदोलन भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ
अबू रास से एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ खड़े होने को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि अंसारअल्लाह यानी हूती आंदोलन भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ खड़ा है। उन्होंने पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि दोनों के बीच पहले से दोस्ताना संबंध रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच लड़ाई तेज हो गई है और रियाद अपने सहयोगियों से मदद मांग रहा है।
मक्का समझौते ने बढ़ाई चिंता
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत तीनों देशों ने तय किया है कि किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। समझौते का मकसद आपसी सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
यही समझौता अब यमन के संघर्ष के बीच चर्चा में है। हूतियों के सऊदी अरब पर हमले बढ़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तान और तुर्की सऊदी की मदद किस स्तर तक करेंगे। सितंबर में पाकिस्तान ने साफ कहा था कि उस समय मक्का समझौते के तहत किसी सैन्य जवाब पर चर्चा नहीं हो रही थी, हालांकि जरूरत पड़ने पर समझौते के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
पाकिस्तान को लेकर हूतियों का संदेश
अबू रास का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान सऊदी अरब का करीबी सहयोगी है। वहीं, हूती नेतृत्व पाकिस्तान को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। अबू रास ने पाकिस्तान के साथ पुराने संबंधों का हवाला देकर उसे सऊदी के साथ संघर्ष में सीधे शामिल न होने का संदेश दिया है।
हालांकि पाकिस्तान की तरफ से अब तक हूतियों के इस संदेश को स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं है। सितंबर में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि अगर हूती हमले सऊदी अरब तक फैलते हैं तो मक्का रक्षा समझौते के प्रावधान सक्रिय हो सकते हैं।
तुर्की पर भी हूतियों की नजर
अबू रास ने तुर्की को भी सऊदी की मदद से दूर रहने का संदेश दिया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की ने सऊदी अरब को मुख्य रूप से तकनीकी और रक्षात्मक मदद देना शुरू किया है। इसमें सैन्य उपकरण, खुफिया सहयोग और एयर डिफेंस से जुड़ी सहायता शामिल बताई गई है।
हूती नेता पहले भी मक्का समझौते को लेकर आलोचना कर चुके हैं। सितंबर में अबू रास ने क्षेत्रीय देशों के लिए एक अलग सुरक्षा व्यवस्था बनाने की बात कही थी, जिसमें तुर्की, ईरान, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देशों को शामिल करने का सुझाव दिया था।
सऊदी अरब हूती को गंभीर खतरा मानता है
इस बीच यमन में संघर्ष का असर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर भी पड़ रहा है। अबू रास ने एक अन्य इंटरव्यू में कहा था कि हूतियों की लाल सागर की शिपिंग बंद करने की योजना नहीं है और बातचीत के रास्ते खुले हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब और उसके सहयोगी हूती हमलों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं।
ऐसे में पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका आने वाले दिनों में अहम हो सकती है। मक्का रक्षा समझौते के बाद पहली बड़ी क्षेत्रीय सैन्य चुनौती के तौर पर यमन का संघर्ष इस नए गठजोड़ की वास्तविक क्षमता की भी परीक्षा ले रहा है।


