16 साल बाद ज्योतिष के हिसाब से बदला बेटी का नाम; सिविल कोर्ट से याचिका खारिज, हाईकोर्ट से मिली मंजूरी
कर्नाटक में 16 साल की लड़की का नाम ‘लक्ष्मी’ से ‘वीणा’ करने की याचिका हाईकोर्ट ने मंजूर कर दी। सिविल कोर्ट ने पहले याचिका खारिज की थी।
Karnataka Name Change Case: कर्नाटक में 16 साल की एक लड़की का नाम बदलने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया। माता-पिता अपनी बेटी का नाम ‘लक्ष्मी एन.’ से बदलकर ‘वीणा एन.’ करना चाहते थे। परिवार का कहना था कि ज्योतिष और अंकशास्त्र के अनुसार ‘वीणा’ नाम उसके लिए अधिक शुभ रहेगा। सिविल कोर्ट ने पहले याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए नाम बदलने की अनुमति दे दी।
2010 में हुआ जन्म, नाम रखा गया था लक्ष्मी
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, लड़की का जन्म 10 अक्टूबर 2010 को हुआ था। नामकरण समारोह में उसका नाम ‘लक्ष्मी एन.’ रखा गया था। बाद में माता-पिता ने उसका नाम बदलकर ‘वीणा एन.’ रखने का फैसला किया।
इसके लिए लड़की के पिता ने सिविल कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बेटी को नए नाम से घोषित करने और स्कूल रिकॉर्ड में भी नाम बदलने की मांग की गई थी।
सिविल कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
सिविल कोर्ट ने परिवार की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत का कहना था कि ‘वीणा एन.’ नाम के इस्तेमाल का कोई दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया गया है।
अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि नाम बदलने की मांग को लेकर परिवार ने पहले स्कूल प्रशासन से संपर्क नहीं किया था। इसके बाद पिता ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटा
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानने में गलती की कि ‘वीणा एन.’ नाम पहले से इस्तेमाल होने का दस्तावेजी प्रमाण जरूरी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला स्कूल रिकॉर्ड में हुई किसी गलती को सुधारने का नहीं, बल्कि मौजूदा नाम को बदलने का है। ऐसे में नए नाम से जुड़े पुराने दस्तावेज होने की उम्मीद करना उचित नहीं है।
‘लक्ष्मी’ की जगह ‘वीणा’ रखने की मांग
हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की की मांग यह थी कि आगे उसे ‘वीणा एन.’ नाम से जाना जाए। इसलिए नए नाम का पहले से किसी दस्तावेज में दर्ज होना जरूरी नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी देखा कि नाम बदलने की मांग पर किसी पक्ष ने आपत्ति नहीं जताई थी और इस बदलाव से किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार या हित प्रभावित होने की बात भी सामने नहीं आई।
हाईकोर्ट ने नाम बदलने की दी मंजूरी
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ‘लक्ष्मी एन.’ से ‘वीणा एन.’ नाम बदलने की अनुमति दे दी। साथ ही संबंधित रिकॉर्ड में नए नाम को दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए।
अदालत ने अपने फैसले में यह भी माना कि किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान उसके नाम से जुड़ी होती है और नाम से पहचाने जाने का अधिकार नागरिक अधिकारों से संबंधित है।
स्कूल खुद से नाम नहीं बदल सकता
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल अपने स्तर पर किसी व्यक्ति का नाम बदलने का फैसला नहीं कर सकता। नाम में बदलाव के लिए सक्षम सिविल कोर्ट की डिक्री जरूरी है।
अदालत ने कर्नाटक सरकार के 26 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया, जिसमें नाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि में बदलाव के लिए सक्षम सिविल कोर्ट से डिक्री लेने की बात कही गई है।



