कौन हैं नए वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित? कागरिल जंग से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक रहे शामिल
करीब चार दशक के अनुभव वाले दीक्षित को लड़ाकू विमानों को उड़ाने, उनकी तकनीकी जांच और सैन्य रणनीति से जुड़े कामों का अच्छा अनुभव है।
New Air Chief Marshal: भारतीय वायुसेना को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे। 6 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर के बाद रक्षा क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और करियर की चर्चा हो रही है। दीक्षित ने अपने सैन्य जीवन की शुरुआत फाइटर पायलट के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने वायुसेना और देश की रक्षा व्यवस्था में कई अहम पदों पर काम किया।
करीब चार दशक के अनुभव वाले दीक्षित को लड़ाकू विमानों को उड़ाने, उनकी तकनीकी जांच और सैन्य रणनीति से जुड़े कामों का अच्छा अनुभव है। उनका करियर भारतीय वायुसेना में ऑपरेशनल तैयारी और आधुनिक तकनीक की भूमिका को समझने के लिहाज से अहम माना जाता है।
1986 में फाइटर पायलट के रूप में की थी शुरुआत
आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उन्होंने खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी से पढ़ाई की। इसके अलावा उन्होंने बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी प्रशिक्षण लिया। दीक्षित क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं। उनके पास 3,300 घंटे से अधिक विमान उड़ाने का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर सहित 20 से ज्यादा तरह के विमानों पर उड़ान भरी है।
टेस्ट पायलट के रूप में उन्होंने विमानों की तकनीक और उनकी क्षमता को बेहतर बनाने से जुड़े काम किए। जगुआर और मिग-27 विमानों के एवियोनिक्स यानी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में सुधार से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भूमिका रही।
कई महत्वपूर्ण पदों पर कर चुके हैं काम
वायुसेना में अपने लंबे करियर के दौरान दीक्षित ने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे। इसके बाद उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद पर काम किया। इस भूमिका में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त रक्षा योजना से जुड़े काम महत्वपूर्ण होते हैं।
मई 2025 में उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ का पद संभाला था। जून 2026 के अंत तक इस जिम्मेदारी पर रहने के बाद उन्होंने 1 जुलाई 2026 को वायुसेना के वाइस चीफ का पद संभाला। इस पद पर उन्होंने एयर मार्शल नागेश कपूर की जगह ली। उनके अनुभव में ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर जैसे सैन्य अभियान और अभ्यास भी शामिल हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और आधुनिक रक्षा तकनीक का अनुभव
दीक्षित ने वायुसेना के संचालन और रक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। हाल के वर्षों में भारतीय सेना के तीनों अंगों के बीच बेहतर तालमेल, स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीक पर जोर बढ़ा है। उनके पिछले पदों का अनुभव इन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है।
सितंबर 2026 में उन्होंने पोखरण में आयोजित भारतीय वायुसेना के पहले ड्रोनाथॉन कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया था। इस कार्यक्रम में ड्रोन, बिना पायलट वाले विमान, निगरानी तकनीक और दुश्मन के ड्रोन को रोकने वाली प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। इससे पता चलता है कि वायुसेना में नई तकनीक और ड्रोन की भूमिका पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
सेवा के लिए मिल चुके हैं कई सम्मान
आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए वायु सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी जिम्मेदारी ऐसे समय में होगी, जब भारत अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने, आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने तथा तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। उनके सामने मौजूदा रक्षा जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए वायुसेना को तैयार रखने की जिम्मेदारी होगी।
करीब 40 साल के सैन्य अनुभव के साथ उनका नया पद भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।




