इटली PM मेलोनी देंगी इस्तीफा ? चुनाव जीतने पर एक्स्ट्रा सीटें मिलने प्रस्ताव, कानून पर संसद में वोटिंग, हार पर पद छोड़ने का ऐलान
इटली में चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को संसद में एक्स्ट्रा सीटें देने के प्रस्ताव पर आज संसद में वोटिंग होनी है। मेलोनी ने साफ कहा है कि अगर कानून पास नहीं हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगी

Giorgia Meloni Election Law: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के लिए आज संसद में होने वाली वोटिंग बेहद अहम है। सरकार नई चुनावी व्यवस्था लागू करना चाहती है, जिसमें 42% या उससे ज्यादा वोट पाने वाली सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को बहुमत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा। प्रस्ताव में निचले सदन के लिए 70 और सीनेट के लिए 35 सीटों का बोनस शामिल है। मेलोनी ने साफ कहा है कि अगर कानून पास नहीं हुआ तो वह पद से इस्तीफा दे देंगी। 6 अक्टूबर को निचले सदन में बिल के शुरुआती हिस्सों पर विश्वास मत सरकार के पक्ष में गया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को भी एक अन्य प्रावधान पर सरकार को समर्थन मिला। अब अंतिम मंजूरी के लिए वोटिंग पर सबकी नजर है।
42% वोट पर मिलेगा बहुमत का बोनस
प्रस्तावित कानून के तहत चुनाव में सबसे आगे रहने वाली पार्टी या गठबंधन को, अगर उसे कम से कम 42% वोट मिलते हैं, तो बहुमत का बोनस दिया जाएगा।
इसके तहत निचले सदन में 70 सीट और सीनेट में 35 सीट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, ये सीटें संसद की मौजूदा कुल संख्या के भीतर ही बांटी जाएंगी।
इटली की संसद में निचले सदन की 400 और सीनेट की 200 सीटें हैं। यानी बोनस का मतलब संसद की कुल सीटों में नई सीटें जोड़ना नहीं, बल्कि विजेता गठबंधन को मौजूदा सीटों में से ज्यादा हिस्सेदारी देना है।
उदाहरण से समझिए बोनस सीटों का खेल
मान लीजिए किसी चुनाव में एक गठबंधन को 43% वोट मिलते हैं और वह सबसे आगे रहता है। दूसरे गठबंधन को 35% और बाकी दलों को 22% वोट मिलते हैं।
ऐसी स्थिति में 42% की सीमा पार करने वाले विजेता गठबंधन को बहुमत का बोनस मिलेगा। इससे उसकी संसद में सीटों की संख्या उसके सामान्य वोट शेयर से अधिक हो सकती है।
अगर कोई गठबंधन 42% तक नहीं पहुंचता या दोनों सदनों में चुनाव परिणाम अलग-अलग रहते हैं, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सीटों का बंटवारा सामान्य आनुपातिक तरीके से होगा।
मेलोनी के लिए क्यों अहम है यह वोटिंग?
मेलोनी की सरकार इस सुधार को राजनीतिक स्थिरता से जोड़कर देख रही है। सरकार का तर्क है कि स्पष्ट संसदीय बहुमत मिलने से चुनाव के बाद गठबंधन बनाने की मजबूरी कम होगी और सरकार को अपना कार्यकाल पूरा करने में मदद मिलेगी।
वहीं, विपक्ष का आरोप है कि चुनावी व्यवस्था में इस तरह का बदलाव सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचा सकता है। विपक्ष इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण बता रहा है।
कानून को ‘स्टैबिलिकम’ और ‘मेलोनेल्लुम’ नाम
इस चुनावी सुधार को सत्तारूढ़ पक्ष के समर्थक ‘स्टैबिलिकम’ नाम से जोड़ रहे हैं। इसका उद्देश्य ही राजनीतिक स्थिरता बताया जा रहा है।
वहीं, विपक्षी दल इसे ‘मेलोनेल्लुम’ कह रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि कानून का फायदा मेलोनी की राजनीतिक ताकत को मिल सकता है। इटली की राजनीति में यह नाम अब चुनावी सुधार की बहस का हिस्सा बन चुका है।
प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम पहले बताना होगा
प्रस्तावित व्यवस्था में चुनाव लड़ने वाली पार्टी या गठबंधन को पहले ही यह बताना होगा कि वह प्रधानमंत्री पद के लिए किस उम्मीदवार को आगे कर रहा है।
सरकार का तर्क है कि इससे मतदाताओं को चुनाव से पहले यह स्पष्ट रहेगा कि जीत की स्थिति में सरकार का नेतृत्व कौन करेगा। वहीं, विरोधियों का कहना है कि इससे राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
2005 के कानून से अलग है नई व्यवस्था
इटली में इससे पहले भी चुनावी व्यवस्था के जरिए बहुमत सुनिश्चित करने की कोशिश हो चुकी है। 2005 के चुनावी कानून में भी विजेता को अतिरिक्त सीटें देने का प्रावधान था।
हालांकि, 2013 में इटली की संवैधानिक अदालत ने उस व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। मौजूदा प्रस्ताव में 42% वोट की न्यूनतम सीमा तय की गई है, जिसके बाद ही बहुमत बोनस लागू होगा।
इटली में 80 साल में 68 सरकारें बनीं
इटली में सरकारों के अस्थिर रहने का लंबा इतिहास है। 1946 में इटली के गणराज्य बनने के बाद से अब तक वहां 68 सरकारें बन चुकी हैं। 1954 में एक सरकार तो सिर्फ 22 दिन चली थी।
पिछले महीने जॉर्जिया मेलोनी ने एक रिकॉर्ड बनाया। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार इटली के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई।
मेलोनी की मौजूदा सरकार का पांच साल का कार्यकाल अगले साल खत्म होना है। हालांकि, अगर इस कानून को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में टूट होती है तो देश में समय से पहले चुनाव भी हो सकते हैं।
अब संसद के फैसले पर टिकी नजर
नई चुनावी व्यवस्था को लेकर इटली की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार इसे स्थिरता के लिए जरूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रहा है।
अब अंतिम वोटिंग का नतीजा तय करेगा कि मेलोनी सरकार का प्रस्ताव आगे बढ़ता है या चुनावी कानून को लेकर इटली में राजनीतिक संकट की नई स्थिति बनती है।

