Parliament Monsoon Session 2026 : राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर जोरदार बहस! खड़गे ने सरकार को घेरा, नड्डा बोले- साबित करें
Parliament Monsoon Session 2026 : राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष कई दिनों से छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है,
Parliament Monsoon Session 2026 : नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को राज्यसभा में एंटी पेपर लीक (पब्लिक एग्जामिनेशन अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक पेश किया। इससे एक दिन पहले लोकसभा इस विधेयक को पारित कर चुकी थी। राज्यसभा में इस विधेयक पर लगभग सात घंटे चर्चा प्रस्तावित है। चर्चा की शुरुआत विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। सरकार का कहना है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
विपक्ष ने गृह मंत्री के बयान और जवाबदेही की मांग उठाई
चर्चा शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने संसद में गतिरोध का मुद्दा उठाया। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष कई दिनों से छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार इस पर सहमत नहीं है।
वहीं लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया, जिसके कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका और सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने छात्रों से जुड़े घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।
खड़गे ने कानून का समर्थन किया
राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून के पक्ष में है, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार ने पहले मजबूत कानून लाने में देरी की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी प्रभावी कानून की मांग की थी। खड़गे ने परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की।
उन्होंने वार्षिक परीक्षा कैलेंडर तय करने, पेपर लीक मामलों की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। अपने भाषण में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े राजनीतिक आरोप भी लगाए, जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कुछ टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटाने का फैसला
बहस के दौरान कई बयानों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कुछ टिप्पणियों पर सत्तापक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। सदन के सभापति ने नियमों के तहत कुछ टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने (एक्सपंज) का निर्देश दिया।
चर्चा के दौरान कई बार नारेबाजी भी हुई, हालांकि बाद में कार्यवाही फिर शुरू कराई गई। सभापति ने सभी सदस्यों से संसदीय मर्यादा बनाए रखने और विषय पर केंद्रित चर्चा करने की अपील की।
जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि देश में UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), IBPS और NTA जैसी संस्थाएं करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित करती हैं।
ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कानून आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना का विचार वर्षों पहले सामने आया था और मौजूदा सरकार ने इस दिशा में कई सुधार लागू किए हैं।
संसद में गतिरोध के बीच PM की उच्चस्तरीय बैठक
संसद की कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
हालांकि बैठक के एजेंडे की आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। संसद के दोनों सदनों में जारी गतिरोध और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के बीच इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब राज्यसभा की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
यदि यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक के मामलों की जांच तय समय में पूरी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। वहीं विपक्ष चाहता है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में संस्थागत सुधार और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।