स्वाइन फ्लू से भोपाल में पहली मौत, MP में मरीजों की संख्या 175 के पास पहुंची
विशेषज्ञों के मुताबिक उम्रदराज लोगों के अलावा पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों में फ्लू संक्रमण के गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर समय गंवाए बिना चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
MP News: मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भोपाल में 80 साल के बुजुर्ग की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। बुजुर्ग सांस संबंधी समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। इंदौर में 1 अगस्त से 10 सितंबर के बीच जांच किए गए 292 सैंपलों में से 172 एच1एन1 पॉजिटिव मिले थे। बताया जा रहा है कि प्रदेश में मरीजों की संख्या 175 के पास पहुंच गई है। वहीं भोपाल में एक्टिव मरीजों की संख्या 65 हैं, जिनमें 12 दिनों में ही 45 मरीज मिले हैं।
80 साल के बुजुर्ग की मौत
ओल्ड मीनाल रेसीडेंसी निवासी 80 वर्षीय राम सिंह ने इलाज के के दौरान दम तोड़ दिया। राम सिंह को H1N1 संक्रमण के साथ सांस से जुड़ी गंभीर परेशानी हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उनकी हालत बिगड़ने पर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेलियर जैसी स्थिति बनी। बुजुर्ग को पहले से हृदय संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक उम्रदराज लोगों के अलावा पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों में फ्लू संक्रमण के गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर समय गंवाए बिना चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
पहले भी बढ़ रहे थे H1N1 के मामले
भोपाल में अगस्त के दौरान भी H1N1 संक्रमण के मामले सामने आए थे। उस समय स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने के साथ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी थी। नागरिकों को सांस और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने, बीमार होने पर घर पर रहने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं, खासकर एंटीबायोटिक नहीं लेने की सलाह दी गई थी।
सितंबर में मामलों की संख्या बढ़ने के बाद अब संदिग्ध मरीजों की जांच और निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की स्थिति पर नजर रख रहा है और जरूरत के मुताबिक अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?
स्वाइन फ्लू के लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान जैसी शिकायतें हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत मानी जाती है। सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार, सीने में दर्द या ऑक्सीजन स्तर कम होने जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
भोपाल में सितंबर के दौरान संक्रमण की तेज रफ्तार और पहली मौत के बाद फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती गंभीर मरीजों की समय पर पहचान और उपचार है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर घबराने के बजाय सावधानी और समय पर चिकित्सा सलाह को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
