मंदाकिनी नदी के किनारे बने घरों पर चल सकता है बुलडोजर, भीषण बाढ़ के बाद अतिक्रमण को लेकर प्रशासन अलर्ट
रिपोर्टों के मुताबिक, यह बाढ़ दो दशक से अधिक समय में क्षेत्र की सबसे गंभीर बाढ़ घटनाओं में शामिल रही। भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से आए पानी के कारण मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
MP News: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की विनाशकारी बाढ़ के बाद अब प्रशासन ने नदी के आसपास हुए अतिक्रमण को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। सतना जिला प्रशासन ने चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी के किनारे बने भवनों और अन्य निर्माणों की स्थिति जांचने के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की है। टीम यह पता लगाएगी कि कहीं कोई निर्माण नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा तो नहीं बन रहा। साथ ही बाढ़ के नए हाई फ्लड लेवल का आकलन भी किया जाएगा।
मझगवां SDM की अगुवाई में जांच
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. के निर्देश पर बनाई गई टीम का नेतृत्व मझगवां एसडीएम करेंगे। इसमें नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग के एसडीओ और नगर परिषद के सभी इंजीनियर को शामिल किया गया है।
प्रशासन का फोकस केवल अवैध कब्जों तक सीमित नहीं रहेगा। टीम नदी के किनारे मौजूद सरकारी और निजी निर्माणों की स्थिति देखेगी। इसके अलावा नदी क्षेत्र में हुई अवैध प्लॉटिंग की भी जांच की जाएगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित निर्माण निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
बाढ़ ने बदल दी तस्वीर
मंदाकिनी में अगस्त के आखिरी दिनों में आई बाढ़ ने चित्रकूट में भारी तबाही मचाई थी। 28 और 29 अगस्त की रात नदी का जलस्तर आरोग्यधाम क्षेत्र में 145.76 मीटर तक पहुंच गया था। प्रशासन के मुताबिक निर्धारित हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर था। यानी पानी पुराने निर्धारित स्तर से काफी ऊपर चला गया था। इस बाढ़ में हनुमानधारा पुल को भी नुकसान पहुंचा और नदी किनारे के कई इलाकों में पानी भर गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह बाढ़ दो दशक से अधिक समय में क्षेत्र की सबसे गंभीर बाढ़ घटनाओं में शामिल रही। भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से आए पानी के कारण मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
हाई फ्लड लेवल नए सिरे से तय होगा
प्रशासन अब पुराने आंकड़ों के आधार पर ही नदी किनारे निर्माण की स्थिति तय नहीं करना चाहता। जांच के दौरान मंदाकिनी के हाई फ्लड लेवल का नए सिरे से आकलन किया जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि नदी के संभावित फैलाव वाले क्षेत्र में कौन-कौन से निर्माण जोखिम की जद में आते हैं।
टीम पुराने और जर्जर भवनों की भी पहचान करेगी। साथ ही नए निर्माण और उन इमारतों की जांच होगी, जिनका हाल में पुनर्निर्माण किया गया है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अतिक्रमण हटाने की तैयारी
मंदाकिनी के बहाव क्षेत्र में बने अवरोधों को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी कार्रवाई की बात कह चुके हैं। उन्होंने नदी के प्रवाह में बाधा बनने वाले सरकारी और निजी अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था। अब जांच टीम के गठन के बाद यह साफ होने की उम्मीद है कि कौन से निर्माण वास्तव में नदी के बहाव और बाढ़ के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने पर जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम करना है।

