MP में बसों को AI बताएगा कब चलना- रुकना है, मोबाइल पर आएगा टिकट; रूट बदलने पर बजेगा अलार्म
सरकार ने बसों में CCTV कैमरे और पैनिक बटन लगाने की योजना भी बनाई है। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा।
MP News: मध्य प्रदेश में आने वाले समय में बस से सफर करना मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग हो होने वाला है। बस कहां चलेगी, किस समय पहुंचेगी और तय रूट पर उसका संचालन सही तरीके से हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) के जरिए की जाएगी। राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन को डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम से जोड़ने की तैयारी कर रही है।
इंदौर में आयोजित यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में प्रदेश के भविष्य के सार्वजनिक परिवहन को लेकर कई बड़े प्रस्ताव सामने आए हैं। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य 15 हजार से ज्यादा आधुनिक बसों का नेटवर्क तैयार करना है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों को शहरों से जोड़ने और परिवहन को ज्यादा व्यवस्थित बनाने पर जोर है।
AI और डेटा से तय होगा बसों का संचालन
नई व्यवस्था में सिर्फ बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर नहीं है, बल्कि उनके संचालन को भी तकनीक से नियंत्रित करने की योजना है। अलग-अलग इलाकों में यात्रियों की जरूरत, ट्रैफिक और उपलब्ध रूट जैसे आंकड़ों के आधार पर बसों के संचालन की योजना तैयार की जा सकती है।
रूट से किसी बस के भटकने या निर्धारित संचालन में गड़बड़ी होने पर कंट्रोल सिस्टम तक इसकी जानकारी पहुंचने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। यानी अब एआई कमांड देगा कि बस को कब चलना और रुकना है। इससे ऑपरेटर और संबंधित अधिकारी बस की स्थिति पर नजर रख सकेंगे। यानी
मोबाइल से टिकट और बस की जानकारी
स्मार्ट परिवहन व्यवस्था में यात्रियों के लिए डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर रहेगा। टिकटिंग को तकनीक से जोड़ने से यात्रियों को काउंटर या परिचालक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मोबाइल आधारित सूचना व्यवस्था के जरिए बस के समय, रूट और यात्रा से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।
बसों में पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाने की भी योजना है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान जरूरी अपडेट मिल सकेंगे।
GPS से हर बस की लाइव लोकेशन
नई बसों में GPS और रियल टाइम व्हीकल ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी। यानी कंट्रोल सेंटर से यह पता लगाया जा सकेगा कि बस इस समय कहां है और निर्धारित समय के अनुसार चल रही है या नहीं।
सरकार ने बसों में CCTV कैमरे और पैनिक बटन लगाने की योजना भी बनाई है। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा।
55 जिलों में रूट का सर्वे
सरकार की योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रूट नेटवर्क तैयार करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 55 जिलों में डेटा आधारित रूट सर्वे किया जा चुका है। इसमें सिटी, इंटरसिटी और अंतरराज्यीय मार्गों को शामिल किया गया है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी जहां यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की ज्यादा जरूरत है।
गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा
नई व्यवस्था का फोकस सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य गांवों से कस्बों और शहरों तक आने-जाने के विकल्प बढ़ाना है।
साथ ही इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की योजना है। वर्ष 2027 तक प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य बताया गया है।
20 साल बाद MP की सड़कों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें
इस पूरी योजना के बीच राज्य स्तरीय सरकारी बस सेवा की वापसी भी अहम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 सितंबर को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा सौगात देंगे। योजना के तहत 15 हजार से ज्यादा बसों और करीब 5 लाख किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को व्यवस्थित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का दावा है कि तकनीक, बेहतर कनेक्टिविटी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।


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