गोटमार मेले में पत्थरों की बरसात; 1321 घायल, 8 गंभीर, पुलिस बल रहा तैनात
पांढुर्णा में शुक्रवार को गोटमार मेले में झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई।

Pandhurna Gotmar Mela 2026: मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में शुक्रवार को आयोजित पारंपरिक गोटमार मेले में झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। इस दौरान कुल 1321 लोग घायल हुए, जिनमें 8 की हालत गंभीर बताई गई है। गंभीर घायलों को इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया।
शाम के समय पांढुर्णा पक्ष के एक युवक ने जाम नदी के बीच लगे पलाश के झंडे को कुल्हाड़ी से काट दिया। इसके बाद झंडा चंडी माता मंदिर पहुंचाया गया और इसी के साथ ही मेले के समापन हो गया।
पत्थरबाजी में फूटे सिर, टूटी हड्डियां
गोटमार मेले के दौरान हुई पत्थरबाजी में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। कुछ गंभीर घायलों को सिर, पैर और सीने में गंभीर चोटें आईं। हालत गंभीर होने पर नागपुर रेफर किया गया।
कांग्रेस विधायक भी पत्थरबाजी करते दिखे
पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके भी पत्थरबाजी करते नजर आए। उन्होंने खिलाड़ियों के बीच शामिल होकर दूसरे पक्ष की ओर पत्थर फेंका। महाराष्ट्र के मोवाड से परिवार के साथ मेला देखने आए 5 वर्षीय योगेश मरावी के सिर में पत्थर लगा। सिर से खून निकलने के बाद पिता उसे गोद में लेकर अस्पताल ले गए।
700 पुलिसकर्मियों की तैनाती, 3 ड्रोन से निगरानी
गोटमार मेले को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा 10 CCTV कैमरों और 3 ड्रोन के जरिए पूरे इलाके पर नजर रखी गई। घायलों के इलाज के लिए 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र, 44 डॉक्टर और 22 एंबुलेंस तैनात रहीं।
क्या है गोटमार मेले की परंपरा?
गोटमार मेला पांढुर्णा की एक पुरानी और अनोखी परंपरा है। इस दौरान जाम नदी के दोनों किनारों पर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग जमा होते हैं। परंपरा के तहत नदी के बीच एक झंडा लगाया जाता है और दोनों पक्ष झंडे पर कब्जे के लिए एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं। झंडे को काटकर चंडी माता मंदिर ले जाया जाता हैं, उसके बाद गोटमार मेले का समापन माना जाता है।


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