सीहोर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन गैस लीक, ग्रामीणों को अस्पताल पहुंचाया गया, कई मरीज भर्ती
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया गया कि पानी को साफ करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले क्लोरीन सिलेंडर से गैस निकली। फिलहाल इस दावे की आधिकारिक तौर पर विस्तृत पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और सुरक्षा इंतजामों की स्थिति को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।

MP News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में पानी फिल्टर करने वाले प्लांट में क्लोरीन गैस के दोबारा रिसाव से हड़कंप मच गया। मामला लसुड़िया खास गांव में काहिरी बांध के पास स्थित फिल्टर प्लांट का है। रात में टैंक से गैस का रिसाव होने के बाद आसपास के इलाके में इसका असर महसूस किया गया। गैस की चपेट में आने से कई लोगों को आंखों में तेज जलन, घुटन और सांस लेने में परेशानी हुई। कुछ लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत भी बताई गई है।
घटना के बाद प्रभावित लोगों को इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक करीब 8 से 10 लोग उपचार के लिए पहुंचे, जबकि इनमें से चार लोगों को भर्ती किया गया है। डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती मरीजों का इलाज जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फिलहाल किसी मरीज की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। इससे पहले भी इसी इलाके में क्लोरीन गैस रिसाव की घटना सामने आ चुकी है, जिसके बाद अब दोबारा रिसाव ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
क्लोरीन सिलेंडर के रेस्क्यू के दौरान रिसाव
जानकारी के मुताबिक प्लांट में मौजूद क्लोरीन सिलेंडर को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए तकनीकी टीम काम कर रही थी। इसी दौरान गैस के रिसाव की स्थिति बनी। स्थानीय लोगों के मुताबिक गैस फैलने के बाद आसपास के लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन होने लगी। हालांकि रिसाव की सटीक वजह और जिम्मेदारी को लेकर जांच की जरूरत है।
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया गया कि पानी को साफ करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले क्लोरीन सिलेंडर से गैस निकली। फिलहाल इस दावे की आधिकारिक तौर पर विस्तृत पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और सुरक्षा इंतजामों की स्थिति को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।
अस्पताल में चार मरीज भर्ती
गैस रिसाव के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अचानक मरीज पहुंचने लगे। आरएमओ डॉ. हरिओम गुप्ता के अनुसार लसुड़िया खास से करीब 8 से 10 लोग उपचार के लिए आए थे। इनमें से चार को अस्पताल में भर्ती किया गया। मरीजों में प्रेमजी, अनमोल, केसर सिंह और प्रेम सिंह के नाम बताए गए हैं। कुछ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की जांच शुरू की और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इससे पहले हुई घटना में भी पुलिस और प्रशासन ने प्रभावित लोगों को अस्पताल पहुंचाया था तथा अधिकारियों ने सभी मरीजों के खतरे से बाहर होने की जानकारी दी थी।
पुलिस और SDRF मौके पर मौजूद
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, डॉक्टरों की टीम और राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF के जवान मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए। अधिकारियों की प्राथमिकता रिसाव को नियंत्रित करने और लोगों को गैस के संपर्क से दूर रखने की रही। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्लोरीन का इस्तेमाल पानी को शुद्ध करने में किया जाता है, लेकिन इसके रिसाव की स्थिति में लोगों को सांस और आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे में प्लांट पर गैस सिलेंडरों की हैंडलिंग, सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल प्रशासन और तकनीकी टीम घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। यह स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा कि टैंक में लीकेज किस वजह से हुआ और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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