PM मोदी स्वामी चिन्मयानंद होलोग्राम से बात की, 'चिन्मय अमृत महोत्सव' पर उन्हें याद कर हुए भावुक
इस अनुभव ने प्रधानमंत्री को करीब 33 साल पहले हुई अपनी मुलाकात की याद दिला दी। मोदी ने कहा कि ऐसा लगा, जैसे वह समय में पीछे लौट गए हों और गुरुदेव के साथ बिताए पल फिर से जीवंत हो उठे हों।
PM Modi Inaugurates Chinmaya Amrit Mahotsav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर को भारत मंडपम में तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को याद कर भावुक हो गए। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम यानी तकनीक से तैयार की गई उनकी त्रि-आयामी डिजिटल छवि के जरिए उनसे बात की। इस अनुभव ने प्रधानमंत्री को करीब 33 साल पहले हुई अपनी मुलाकात की याद दिला दी। मोदी ने कहा कि ऐसा लगा, जैसे वह समय में पीछे लौट गए हों और गुरुदेव के साथ बिताए पल फिर से जीवंत हो उठे हों।
1993 की मुलाकात को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उनकी स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात 1993 में गुजरात के वडोदरा में हुई थी। उस मुलाकात में युवाओं की ताकत और उनके जरिए मजबूत भारत बनाने पर चर्चा हुई थी। मोदी ने कहा कि गुरुदेव के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उन्हें याद है।
होलोग्राम के जरिए स्वामी चिन्मयानंद की छवि को देखकर और उससे संवाद का अनुभव लेकर प्रधानमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने इस तकनीक और आयोजन के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का आशीर्वाद उनकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा में लगातार साथ रहा है। मोदी ने यह भी याद किया कि स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के कुछ साल बाद उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से वह सरकार के प्रमुख के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।
क्या है चिन्मय अमृत महोत्सव?
चिन्मय अमृत महोत्सव, चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने 23 अक्टूबर को भारत मंडपम में तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 25 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें भारत और विदेशों से 9,000 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
चिन्मय मिशन की स्थापना 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। इसका उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। मिशन आध्यात्मिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति, युवाओं को प्रेरित करने और समाज सेवा से जुड़े काम भी करता है।
युवाओं की भूमिका पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की पुरानी परंपराओं और विचारों से प्रेरणा लेकर विकसित भारत का सपना पूरा किया जा सकता है।
स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को याद करते हुए उन्होंने युवाओं को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। इस आयोजन में होलोग्राम के जरिए संवाद का अनुभव खास आकर्षण रहा, जिसने प्रधानमंत्री को अपनी पुरानी यादों से जोड़ दिया।


