कौन हैं 'गुड महाराजा', PM मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क से क्यों किया जिक्र?
दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 2025 में करीब 6.36 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। पोलैंड इस कारोबार को और बढ़ाना चाहता है। इसके लिए नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच आयोजित किया जा रहा है।
PM Modi Talks About Good Maharaja: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की गुरुवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। 21 से 23 अक्टूबर तक भारत दौरे पर आए टस्क के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इस बैठक में कारोबार, रक्षा, अंतरिक्ष और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर रहा। इस दौरान भारत और पोलैंड के बीच पुराने रिश्तों की याद भी सामने आई। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गुड महाराजा’ का जिक्र किया, जिनकी वजह से दूसरे विश्व युद्ध के समय सैकड़ों पोलिश बच्चों को भारत में सुरक्षित रहने का मौका मिला था।
जब भारत ने पोलिश बच्चों को दिया था सहारा
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड पर जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद वहां के हजारों लोग बेघर हो गए थे। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल थे। ऐसे मुश्किल समय में गुजरात की नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा ने 1942 में जामनगर के पास बालाचड़ी में एक हजार से ज्यादा पोलिश बच्चों को शरण दी।
बच्चों के रहने, खाने, पढ़ाई और इलाज का इंतजाम किया गया। उन्हें अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर भी मिला। इसी मानवीय मदद के कारण पोलैंड में महाराजा को ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ के नाम से याद किया जाता है। भारत में पोलिश शरणार्थियों को कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में भी जगह मिली थी। यहां पांच हजार से ज्यादा पोलिश महिलाओं और बच्चों को शरण दी गई। युद्ध खत्म होने के बाद शरणार्थी अपने देश लौटने लगे। महाराजा के योगदान को सम्मान देने के लिए 1989 में वारसॉ में उनके नाम पर ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ बनाया गया।
16 साल बाद भारत आए पोलैंड के प्रधानमंत्री
डोनाल्ड टस्क इससे पहले 2010 में प्रधानमंत्री के रूप में भारत आए थे। इस बार उनके साथ पोलैंड के वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया है। दोनों देशों के बीच 2024 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा तय किया गया था। मौजूदा दौरा इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2030 तक कारोबार दोगुना करने की तैयारी
भारत और पोलैंड रक्षा उपकरणों के डिजाइन, विकास और उत्पादन में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष, सूचना तकनीक, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर है।
भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 2025 में करीब 6.36 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। पोलैंड इस कारोबार को और बढ़ाना चाहता है। इसके लिए नई दिल्ली में भारत-पोलैंड व्यापार मंच आयोजित किया जा रहा है। टस्क 23 अक्टूबर को बेंगलुरु जाएंगे, जहां वे आईटी और अंतरिक्ष क्षेत्र के कारोबारियों से मिलेंगे।
यूक्रेन युद्ध पर भी होगी चर्चा
दोनों देशों के नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा करेंगे। इनमें यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें शामिल हैं। पोलैंड यूरोप का अहम देश है, जबकि भारत वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग व्यापार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।


