267 करोड़ खर्च, फिर भी गड्ढे और ट्रैफिक जाम; इंदौर में 4 सिक्स लेन फ्लायओवर का निर्माण काम क्यों धीमा?
इन परियोजनाओं का निर्माण 2023-24 में शुरू हुआ था। निर्धारित समय सीमा दिसंबर 2026 रखी गई है, लेकिन निर्माण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोगों को पूरी सुविधा मिलने में 2027 तक का समय लग सकता है।
MP News: मध्य प्रदेश के सबसे व्यस्त शहरों में शामिल इंदौर में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए बनाए जा रहे चार सिक्स लेन फ्लायओवर अब लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। मूसाखेड़ी, देवास नाका, सत्यसाईं चौराहे और क्रिस्टल आईटी पार्क पर चल रहे निर्माण कार्यों की रफ्तार धीमी होने से वाहन चालकों को रोजाना जाम, धूल और खराब सड़कों का सामना करना पड़ रहा है। इन चारों परियोजनाओं पर करीब 267 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद सभी फ्लायओवर का काम समय पर पूरा होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन परियोजनाओं का निर्माण 2023-24 में शुरू हुआ था। निर्धारित समय सीमा दिसंबर 2026 रखी गई है, लेकिन निर्माण की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोगों को पूरी सुविधा मिलने में 2027 तक का समय लग सकता है।
चारों फ्लायओवर की क्या है स्थिति?
निर्माण की प्रगति के आंकड़ों के अनुसार, देवास नाका फ्लायओवर का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मूसाखेड़ी में 65 प्रतिशत, सत्यसाईं चौराहे पर 60 प्रतिशत और क्रिस्टल आईटी पार्क में लगभग 55 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। यानी चारों जगह अभी काफी काम बाकी है।
फ्लायओवर तैयार होने के बाद इन चौराहों पर वाहनों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल निर्माण के कारण सड़क की जगह कम हो गई है और वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है।
देवास नाका पर भारी वाहनों का दबाव
देवास नाका औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण यहां भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति से जुड़ी दिक्कतों ने भी काम प्रभावित किया है। ऐसे में व्यस्त समय में वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। सत्यसाईं चौराहा विजय नगर और बॉम्बे हॉस्पिटल क्षेत्र को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों में शामिल है। यहां पाइपलाइन शिफ्टिंग के कारण शुरुआती दौर में काम प्रभावित हुआ था। अब गर्डर लगाने और पिलर से जुड़े काम चल रहे हैं। बैरिकेडिंग के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
मूसाखेड़ी में भी सर्विस रोड की हालत और निर्माण के कारण यातायात प्रभावित है। वहीं क्रिस्टल आईटी पार्क के पास जमीन उपलब्ध कराने, साइट सौंपने और गैस पाइपलाइन शिफ्ट करने जैसी समस्याओं के कारण काम की गति धीमी रही।
दिसंबर तक काम पूरा करना बड़ी चुनौती
फ्लायओवर बनाने में केवल पिलर खड़े करना ही पर्याप्त नहीं होता। गर्डर लगाने, सड़क का ऊपरी हिस्सा तैयार करने, एप्रोच रोड बनाने, डामरीकरण और सुरक्षा इंतजामों में भी समय लगता है। इसलिए बचे हुए काम को तय समय में पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसियों को रफ्तार बढ़ानी होगी।
प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि निर्माण के दौरान लोगों को सुरक्षित और बेहतर वैकल्पिक रास्ते मिलें। सर्विस रोड के गड्ढों की मरम्मत, धूल पर नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है। अब सवाल यह है कि क्या चारों फ्लायओवर दिसंबर की समय सीमा तक तैयार हो पाएंगे या इंदौर के लोगों को जाम से राहत के लिए 2027 तक इंतजार करना पड़ेगा।
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