लिव-इन कपल ने ‘अय्याशी’ के लिए बेचा एक महीने का बच्चा, खरीदा सोना और स्मार्ट फोन; कई बार हुआ सौदा
छत्रपति संभाजीनगर में एक महीने के बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। माता-पिता ने बच्चे को 1.2 लाख रुपये में सौंपा, जिसके बाद कई लोगों के जरिए उसकी कीमत 3.5 लाख रुपये तक पहुंची। बच्चे को सुरक्षित बरामद कर सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
One month old baby sold for Rs 3.5 lakh: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक महीने के बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। मुकुंदवाड़ी में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे बच्चे के माता-पिता ने उसे 1.2 लाख रुपये में बेच दिया। इसके बाद बच्चा कई लोगों के हाथों से होते हुए तेलंगाना पहुंचा, जहां उसकी कीमत बढ़कर 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है।
बच्चे को बेचने के बाद खरीदा स्मार्टफोन और सोना
पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के माता-पिता को सौदे के बदले 1.2 लाख रुपये मिले थे। इस रकम में से करीब 25 हजार रुपये का स्मार्टफोन और 62 हजार रुपये के सोने के जेवर खरीदे गए। पुलिस ने दोनों सामान जब्त कर लिए हैं। जांच में यह भी पता चला कि सौदे में शामिल अन्य लोगों को भी रकम मिली थी।
1.2 लाख से शुरू हुआ सौदा 3.5 लाख तक पहुंचा
पुलिस के अनुसार, बच्चे को करीब एक महीने तक अपने पास रखने के बाद माता-पिता ने उसे 1.2 लाख रुपये में सीमा रेशवाल को सौंप दिया। इसके बाद सीमा ने बच्चे को अपनी रिश्तेदार संगीता अव्हड को कथित तौर पर 2.7 लाख रुपये में बेच दिया। संगीता बच्चे को नांदेड़ ले गईं। वहां से उसे तेलंगाना के जगित्याल निवासी सुरेश राजाराम गुंटुका को 3.5 लाख रुपये में सौंपा गया। गुंटुका खुद को MBBS डॉक्टर बताता था, लेकिन जांच में उसकी डॉक्टर होने की पहचान फर्जी निकली।
हैदराबाद की महिला तक पहुंचा बच्चा
जांच के मुताबिक, सुरेश राजाराम गुंटुका ने बच्चे को हैदराबाद में रहने वाली अपनी रिश्तेदार उमा गंगाधर खटकम को सौंप दिया। इस तरह बच्चा महाराष्ट्र से तेलंगाना तक कई लोगों के बीच पहुंच गया। रविवार को गुंटुका और खटकम बच्चे को लेकर मुकुंदवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचे और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया।
गुमनाम सूचना के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले की शुरुआत एक गुमनाम सूचना से हुई। सूचना मिली थी कि मुकुंदवाड़ी में रहने वाले एक दंपती ने अपना बच्चा बेच दिया है। इसके बाद पुलिस ने बच्चे की मां वंदना कांबले को पूछताछ के लिए बुलाया। 20 सितंबर को वंदना ने अपने बच्चे के अपहरण की शिकायत भी दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को शिकायत और बच्चे की खरीद-फरोख्त से जुड़े तथ्यों के बीच कड़ियां मिलीं।
लिव-इन में रहते थे बच्चे के माता-पिता
बता दें, पुलिस जांच में सामने आया कि वंदना कांबले और योगेश कांबले पिछले दो-तीन साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। 5 जुलाई को सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उनके बेटे का जन्म हुआ था। वंदना बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहती थी। उसने इस बारे में अपनी सहकर्मी कौशल्या पवार से मदद मांगी। इसके बाद कौशल्या ने अपनी बेटी सीमा रेशवाल से संपर्क कराया। पुलिस का दावा है कि यहीं से बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंपने का सौदा तय हुआ।
सौदे में किसे कितने पैसे मिले?
पुलिस की जांच के मुताबिक, सीमा रेशवाल को इस पूरे सौदे में करीब 1.1 लाख रुपये मिले। वहीं कौशल्या पवार को 40 हजार रुपये मिलने की बात सामने आई है। कौशल्या ने इस रकम का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने में किया। दूसरी ओर, बच्चे के माता-पिता ने मिले 1.2 लाख रुपये में से 25 हजार रुपये का स्मार्टफोन और 62 हजार रुपये के सोने के आभूषण खरीदे। पुलिस ने इन सामान को बरामद कर लिया है।
पुलिस ने सात लोगों को किया गिरफ्तार
वहीं, बच्चे की खरीद-फरोख्त के मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बच्चे के माता-पिता भी शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 142, 143(4), 3(5) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। समिति ने बच्चे की सुरक्षा और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे अधिकृत बाल देखभाल संस्थान ‘सकार’ को सौंप दिया है।






