लाहौर की हवा दुनिया में सबसे खराब, AQI 410 के पार; टॉप 10 में भारत के 3 शहर
लाहौर में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और फसल के अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
Air Qulity Index: सर्दियों की शुरुआत से पहले दक्षिण एशिया के कई शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को पाकिस्तान का लाहौर दुनिया के सबसे प्रदूषित प्रमुख शहरों की सूची में पहले स्थान पर रहा। 'IQAir' की लाइव रैंकिंग में लाहौर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 410 दर्ज किया गया। इस स्तर पर हवा सेहत के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है।
लाहौर के साथ भारत के शहरों में भी प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। अलग-अलग समय पर अपडेट होने वाली रैंकिंग में दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों की हवा भी खराब दर्ज की गई। हालांकि, AQI के आंकड़े घंटे-दर-घंटे बदलते हैं, इसलिए शहरों की रैंकिंग और प्रदूषण का स्तर भी बदल सकता है।
लाहौर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचा
'IQAir' के आंकड़ों के मुताबिक, लाहौर में प्रदूषण का मुख्य कारण PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण हैं। ये कण सांस के साथ फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में लाहौर में PM2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सालाना गाइडलाइन से 45.2 गुना अधिक बताया गया।
लाहौर में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और फसल के अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
भारत के शहरों में भी बढ़ी चिंता
भारत में भी सर्दियों से पहले हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है। दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर कई बार खराब श्रेणी तक पहुंच रहा है। वहीं, देश के कई अन्य शहरों में भी धूल, वाहनों के धुएं और औद्योगिक गतिविधियों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कई शहरों में AQI दिल्ली से भी ज्यादा दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली का AQI 223 था, जबकि हरियाणा के पंचगांव में यह 378 तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश के हापुड़ और बड़ौत में भी AQI 328 दर्ज किया गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत के कई शहरों में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता और बिगड़ सकती है। हालांकि, अलग-अलग निगरानी प्रणालियों के आंकड़ों की तुलना करते समय उनके समय और मापने के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है।
AQI बढ़ने पर क्या सावधानी रखें?
जब हवा में प्रदूषण ज्यादा हो, तो बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण के गंभीर स्तर पर बाहर दौड़ने या कसरत करने से बचें। जरूरत होने पर ही बाहर निकलें और घर की खिड़कियां बंद रखें, ताकि बाहर की प्रदूषित हवा अंदर कम आए।
AQI का मतलब है हवा में मौजूद प्रदूषण का स्तर। इसका आंकड़ा जितना ज्यादा होता है, हवा से स्वास्थ्य को होने वाला खतरा उतना ही बढ़ता है। इसलिए केवल शहर की रैंकिंग नहीं, बल्कि अपने इलाके का ताजा AQI देखना भी जरूरी है।




