फिलीपींस के वॉरगेम में ब्रह्मोस का दम! चीनी एयर डिफेंस को चुनौती देने वाला बना इकलौता हथियार
ब्रह्मोस मिसाइल नकली चीनी डिस्ट्रॉयर की एयर डिफेंस को भेदने में सक्षम रही। फिलीपींस ने भारत से 375 मिलियन डॉलर में तीन ब्रह्मोस बैटरियां खरीदी हैं। यह घटनाक्रम दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच सामने आया है।

BrahMos Missile Philippines: दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच जारी तनाव के बीच भारत की ब्रह्मोस मिसाइल एक बार फिर चर्चा में है। फिलीपीन मरीन कॉर्प्स के आंतरिक युद्ध सिमुलेशन में ब्रह्मोस ने नकली चीनी नौसैनिक बलों के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया।अभ्यास में शामिल हथियार प्रणालियों में ब्रह्मोस ही ऐसा प्लेटफॉर्म था, जो निर्धारित चीनी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर की वायु रक्षा को भेदने में सक्षम रहा। हालांकि, इस सिमुलेशन के तकनीकी विवरण और इस्तेमाल किए गए चीनी युद्धपोत के सटीक मॉडल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
समुद्री युद्ध की तैयारी में ब्रह्मोस की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस अपनी तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जमीन से दागी जाने वाली मिसाइल प्रणालियों की क्षमता बढ़ा रहा है। इसी रणनीति के तहत फिलीपीन मरीन ब्रह्मोस बैटरी के संचालन और युद्ध की परिस्थितियों में उसके इस्तेमाल की प्रक्रिया का अभ्यास कर रहे हैं।आंतरिक वॉरगेम में अलग-अलग हथियार प्रणालियों की क्षमता का आकलन किया गया। इसमें ब्रह्मोस को नकली चीनी डिस्ट्रॉयर की एयर-डिफेंस व्यवस्था के खिलाफ प्रभावी विकल्प के तौर पर दर्शाया गया। यह निष्कर्ष सिमुलेशन पर आधारित बताया गया है, इसे वास्तविक युद्ध में मिसाइल की सफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
ड्रोन से लक्ष्य की पहचान
बता दें, फिलीपींस और अमेरिका ने अगस्त 2026 में हुए एक अलग सैन्य अभ्यास में समुद्री लक्ष्यों की पहचान और उन पर हमले की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया था। इसमें ड्रोन और जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया। अभ्यास के दौरान फिलीपीन वायु सेना के Hermes UAV का उपयोग नकली समुद्री लक्ष्यों की निगरानी और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए किया गया। इस तरह के ऑपरेशन में ड्रोन से मिली सूचना का इस्तेमाल मिसाइल बैटरी को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जरूरी जानकारी देने में किया जा सकता है। इस रणनीति को सैन्य भाषा में ‘किल चेन’ कहा जाता है। इसमें लक्ष्य का पता लगाने, उसकी पहचान करने, जानकारी साझा करने और फिर हथियार से हमला करने तक के चरण शामिल होते हैं।
भारत से 375 मिलियन डॉलर में खरीदी गईं तीन बैटरियां
जानकारी के अनुसार, फिलीपींस ने 2022 में भारत के साथ करीब 375 मिलियन डॉलर का समझौता किया था। इसके तहत उसे ब्रह्मोस तटीय रक्षा प्रणाली की तीन बैटरियां मिलनी हैं। यह सौदा दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिहाज से अहम माना जाता है। ब्रह्मोस की तैनाती से फिलीपींस को समुद्र के पास स्थित अपने तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और संभावित समुद्री खतरों का मुकाबला करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पहली बैटरी के संचालन के बाद अन्य स्थानों पर तैनाती की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
दक्षिण चीन सागर में क्यों बढ़ा हुआ है तनाव?
बता दें, दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमाओं और द्वीपों पर दावों को लेकर चीन तथा फिलीपींस के बीच लंबे समय से विवाद है। सेकंड थॉमस शोल के आसपास दोनों देशों के सुरक्षाबलों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में फिलीपींस की तटीय मिसाइल क्षमता बढ़ाने की कोशिश को उसकी समुद्री सुरक्षा रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। भारत से ब्रह्मोस की खरीद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, किसी विशेष सैन्य सिमुलेशन के नतीजों से भविष्य के वास्तविक संघर्ष का परिणाम तय नहीं किया जा सकता।
क्या है ब्रह्मोस मिसाइल की खासियत?
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyenia ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इसकी तेज गति और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से दागे जाने की क्षमता इसे तटीय तथा समुद्री रक्षा में उपयोगी बनाती है।
- गति: लगभग मैक 2.8 से मैक 3 तक, यानी ध्वनि की गति से करीब तीन गुना।
- इस्तेमाल: इसके विभिन्न संस्करण जमीन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान से लॉन्च किए जा सकते हैं; कुछ संस्करणों की क्षमताएं अलग होती हैं।
- भूमिका: समुद्री और जमीनी लक्ष्यों के खिलाफ सटीक हमले के लिए विकसित क्रूज मिसाइल प्रणाली।
- रक्षा सहयोग: भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा तकनीक तथा सैन्य उपकरणों के सहयोग का प्रमुख उदाहरण।
फिलीपींस के वॉरगेम से जुड़े दावे ने ब्रह्मोस की क्षमता को लेकर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि, वास्तविक युद्ध में किसी मिसाइल का प्रदर्शन लक्ष्य की स्थिति, दूरी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सेंसर और विरोधी की रक्षा प्रणाली सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
ब्रह्मोस से चीन की टेंशन
फिलीपीन मरीन कॉर्प्स के आंतरिक वॉरगेम को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ब्रह्मोस मिसाइल नकली चीनी डिस्ट्रॉयर की एयर डिफेंस को भेदने में सक्षम रही। फिलीपींस ने भारत से 375 मिलियन डॉलर में तीन ब्रह्मोस बैटरियां खरीदी हैं। यह घटनाक्रम दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच सामने आया है।



