इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा! आइज़ेनकोट के समर्थन में 67 सांसद, PM बनने का रास्ता साफ
इजरायल में सरकार गठन को लेकर सियासी समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट को 120 सदस्यीय संसद के 67 सांसदों का समर्थन मिला है, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में 46 सांसदों ने सिफारिश की है। अब सबकी नजरें राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के 8 नवंबर को होने वाले फैसले पर टिकी हैं।
इजरायल में आम चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर सियासी तस्वीर बदलती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट ने चुनौती पेश की है। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के साथ हुई राजनीतिक दलों की बैठक में 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) के 67 सांसदों ने आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने की सिफारिश की है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थन में 46 सांसद सामने आए हैं।
आइसेनकोट को मिले इस समर्थन में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की अहम भूमिका रही। हालांकि, 67 सांसदों की सिफारिश मिलने का मतलब यह नहीं है कि उनकी सरकार बनना तय हो गया है। राष्ट्रपति को अभी यह तय करना है कि किस नेता के पास सरकार बनाने और गठबंधन को बहुमत तक पहुंचाने की बेहतर संभावना है।
अरब पार्टियों के समर्थन से आइसेनकोट को मिली बढ़त
'द टाइम्स ऑफ इजरायल' और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार 5 नवंबर को अरब पार्टियों के गठबंधन 'जॉइंट लिस्ट' ने गादी आइसेनकोट के समर्थन का ऐलान किया। गठबंधन के 11 सांसदों ने राष्ट्रपति से आइसेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की।
इससे पहले अरब नेतृत्व वाली राआम पार्टी के 8 सांसद भी आइसेनकोट के समर्थन में सिफारिश कर चुके थे। इसके अलावा विपक्षी गठबंधन के 48 सांसद उनके साथ हैं। इस तरह कुल 67 सांसदों ने आइसेनकोट के पक्ष में समर्थन जताया है।
यह संख्या संसद में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से ज्यादा है। हालांकि, इन सभी दलों का एक साथ सरकार में शामिल होना अभी तय नहीं है।
नेतन्याहू के गठबंधन के पास 53 सीटें
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसे 27 सीटें मिलीं। वहीं, गादी आइसेनकोट की यशार पार्टी ने 21 सीटें हासिल कीं।
चुनाव के बाद नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 53 सीटें हैं। दूसरी तरफ आइसेनकोट के नेतृत्व वाले यहूदी विपक्षी दलों के गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। अरब नेतृत्व वाली दो पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं।
ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन सरकार गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, आइसेनकोट के सामने इन दलों के समर्थन को स्थायी राजनीतिक व्यवस्था में बदलने की चुनौती होगी।
नेतन्याहू को अपने सहयोगी दल से भी नहीं मिला समर्थन
सरकार गठन की इस प्रक्रिया में नेतन्याहू को अपने पुराने सहयोगी दल यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म (UTJ) से भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। पार्टी ने राष्ट्रपति के सामने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में सिफारिश नहीं करने का फैसला किया।
राष्ट्रपति की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 7 सांसदों ने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में सिफारिश नहीं की।
इससे नेतन्याहू के सामने गठबंधन को दोबारा मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो गई है। दूसरी ओर, आइसेनकोट को समर्थन देने वाले दलों के बीच भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं
राष्ट्रपति हर्ज़ोग रविवार को करेंगे फैसला
राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने 5 नवंबर को सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श पूरा करने के बाद कहा कि वह रविवार, 8 नवंबर को किसी एक सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला करेंगे।
हर्ज़ोग ने स्पष्ट किया कि केवल सांसदों की सिफारिशों के आधार पर फैसला नहीं होगा। उन्हें यह भी देखना होगा कि कौन-सा नेता अलग-अलग दलों को साथ लेकर बहुमत वाली सरकार बना सकता है।
जिस नेता को सरकार बनाने का मौका मिलेगा, उसे इसके लिए 28 दिन का समय दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर 14 दिन का अतिरिक्त समय भी मिल सकता है। फिलहाल नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे।





