इस दिवाली भी बिक रही कार्बाइड गन, 2200 रुपये तक कीमत; पिछले साल सैकड़ों लोगों की आंख जल गई थी
इसमें कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्वलनशील गैस बनती है। आग लगने पर तेज धमाका होता है। इससे आंखों, चेहरे और शरीर को गंभीर चोट पहुंच सकती है।
MP News: दिवाली पर पटाखों के साथ कार्बाइड गन का इस्तेमाल भी लोगों के लिए खतरा बन रहा है। पिछले साल मध्य प्रदेश में इस गन से हुए हादसों में करीब 300 लोगों की आंखों को नुकसान पहुंचा था। अकेले भोपाल में लगभग 185 से 186 मामले सामने आए थे। इसके बावजूद इस बार भी बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी बिक्री को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल ही में जबलपुर में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने कार्बाइड गन की बड़ी खेप जब्त की है।
बंदर भगाने वाली गन के नाम से बिक्री
कार्बाइड गन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर PVC Monkey Repeller Gun यानी बंदर भगाने वाली गन के नाम से बेचा जा रहा है। यह खेती में बंदरों और पक्षियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण के रूप में प्रचारित की जाती है। लेकिन इसका इस्तेमाल पटाखे की तरह करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
इसमें कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से ज्वलनशील गैस बनती है। आग लगने पर तेज धमाका होता है। इससे आंखों, चेहरे और शरीर को गंभीर चोट पहुंच सकती है। धमाके के साथ निकलने वाले कण आंखों की रोशनी तक प्रभावित कर सकते हैं। पिछले साल दीपावली के दौरान भोपाल, विदिशा, ग्वालियर और इंदौर समेत कई जिलों में इसके मामले सामने आए थे।
ऑनलाइन 2200 रुपये तक कीमत
एक ई-कॉमर्स साइट पर कार्बाइड गन 1300 से 2200 रुपये तक की कीमत है। वेबसाइट पर सात दिन के भीतर डिलीवरी का दावा भी किया गया। इसे अलग नाम से बेचने के कारण इसकी पहचान और बिक्री पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन रहा है। पिछले साल भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस तरह के उपकरण उपलब्ध थे। हादसों के बाद पुलिस ने ई-कॉमर्स कंपनियों को बिक्री रोकने के लिए पत्र लिखने की तैयारी की थी।
पिछले साल 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे
पिछले साल दीपावली पर मध्यप्रदेश में कार्बाइड गन से हुए हादसों में 300 से ज्यादा लोगों की आंखों में चोट लगी थी। अकेले भोपाल में 185 मामले सामने आए थे। इस बार भी त्योहार से पहले इसकी बिक्री को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मंत्री ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कार्बाइड गन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को पत्र लिखा है। उन्होंने बाजारों के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी इसकी बिक्री बंद कराने की मांग की है। सारंग का कहना है कि पिछले साल हुए हादसों में लोगों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा था, इसलिए इस बार समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अधिकारियों को कार्बाइड गन और लैंप की बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं। भोपाल में पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। जबलपुर में हालिया कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कार्बाइड गन के साथ कैल्शियम कार्बाइड और इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी जब्त की। हालांकि, ऑनलाइन बिक्री की आशंका के बीच सवाल यह है कि प्रतिबंधात्मक आदेशों के बावजूद ऐसे खतरनाक उपकरण लोगों तक कैसे पहुंच रहे हैं।