बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ने बिना अटेंडेंस रिकॉर्ड के 275 करोड़ की सैलरी बांट दी, RTI में 35 सालों का चौंकाने वाला खुलासा
मामला विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह के RTI आवेदन से सामने आया है। उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति और वेतन भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी थी। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में वेतन भुगतान को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी में पता चला है कि विश्वविद्यालय के पास 1988 से 2023 के बीच शिक्षकों और अधिकारियों की हाजिरी का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस अवधि में करीब 275 करोड़ रुपये वेतन के रूप में दिए गए। अब सवाल उठ रहा है कि जब कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड ही नहीं था, तो वेतन किस आधार पर जारी किया जाता रहा।
यह मामला विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह के RTI आवेदन से सामने आया है। उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति और वेतन भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी थी। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
वेतन बिल किसने किए मंजूर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल वेतन बिलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर है। धर्मेंद्र सिंह ने मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि वेतन बिल किसने तैयार किए और किन अधिकारियों ने उन्हें प्रमाणित किया। साथ ही, यह भी जांच होनी चाहिए कि भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की जांच की जाती थी।
हाजिरी रजिस्टर नहीं मिलने के बावजूद यह संभव है कि विभागों में दूसरे तरह के रिकॉर्ड रखे गए हों। ऐसे में जांच के दौरान शिक्षकों की क्लास, विभागीय रिपोर्ट, छुट्टी के आवेदन और वेतन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जरूरी होगी। इससे यह पता चल सकेगा कि कर्मचारियों की उपस्थिति किस तरह जांची जाती थी और वेतन भुगतान के नियमों का पालन हुआ या नहीं।
रजिस्ट्रार बोले- निष्पक्ष जांच कराई जाएगी
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एसबी सिंह ने मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है, लेकिन इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। उनके मुताबिक, सभी जरूरी दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल होगी। जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां जिम्मेदारी तय की जाएगी।
रजिस्ट्रार ने जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी रखने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय की जांच में किन अधिकारियों की भूमिका सामने आती है और पुराने रिकॉर्ड से क्या जानकारी मिलती है।
5 विभागों से 20 विभागों तक पहुंचा विश्वविद्यालय
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की शुरुआत 1970 में भोपाल यूनिवर्सिटी के नाम से हुई थी। 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 1988 में यहां पांच विभाग और पांच शिक्षक थे। समय के साथ विश्वविद्यालय का विस्तार हुआ। अब यहां 20 विभाग और करीब 40 शिक्षक हैं। इसके अलावा 21 संविदा शिक्षक और लगभग 250 अतिथि शिक्षक भी पढ़ाते हैं।
विश्वविद्यालय का सालाना खर्च करीब 13 करोड़ रुपये बताया गया है। साल 2025 में इसे NAAC से A ग्रेड भी मिला था। ऐसे में पुराने वेतन भुगतान और हाजिरी के रिकॉर्ड से जुड़ा मामला संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
जांच से सामने आएगा पूरा सच
इस मामले में करीब 275 करोड़ रुपये के भुगतान का जिक्र है, जबकि कुछ रिपोर्टों में 250 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी सामने आया है। इसलिए जांच में भुगतान की कुल राशि का मिलान करना भी जरूरी होगा।
फिलहाल हाजिरी रिकॉर्ड नहीं मिलने से प्रशासनिक लापरवाही के सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन इसे वित्तीय घोटाला साबित करने के लिए जांच और दस्तावेजी प्रमाण जरूरी हैं। अब विश्वविद्यालय की जांच से ही स्पष्ट होगा कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।



