इंदौर की डॉक्टर को देश में पहला स्थान, इंटरनेट पर देखकर खुद इंजेक्शन लगाने से युवक की मौत के मामले में डॉ. प्रज्ञा ने किया था शोध
अगस्त 2025 में नेपाली युवक की मौत के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने उसके किराए के कमरे की जांच की थी। युवक होटल में शेफ का काम करता था और कुछ समय पहले ही इंदौर आया था।
MP News: इंटरनेट पर मौजूद वीडियो और जानकारी का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है, इसका एक मामला इंदौर में सामने आया था। अगस्त 2025 में विजय नगर क्षेत्र में रहने वाले एक नेपाली युवक की दर्द निवारक दवा के गलत इस्तेमाल से मौत हो गई थी। अब इस मामले की फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक विश्लेषण पर तैयार शोधपत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान मिला है। MGM मेडिकल कॉलेज इंदौर की डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया ने यह शोधपत्र प्रस्तुत किया।
किराए के कमरे में मिले अहम सबूत
अगस्त 2025 में नेपाली युवक की मौत के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने उसके किराए के कमरे की जांच की थी। युवक होटल में शेफ का काम करता था और कुछ समय पहले ही इंदौर आया था। पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे। हालांकि, जांघ के पास एक छोटा-सा निशान मिलने के बाद जांच की दिशा बदल गई। कमरे की तलाशी में दर्द निवारक दवाओं की दो स्ट्रिप, पाउडर के अवशेष वाला चम्मच, लाइटर और सिरिंज मिली थी। पुलिस ने युवक का मोबाइल फोन भी जांच के लिए लिया।
मोबाइल की सर्च हिस्ट्री से खुला मामला
जांच के दौरान युवक के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में यूट्यूब पर दवा के असामान्य इस्तेमाल से जुड़े वीडियो मिले। इन जानकारियों के आधार पर फॉरेंसिक टीम ने आशंका जताई कि युवक ने इंटरनेट पर देखे गए तरीके को अपनाया था। दवा की अधिक मात्रा उसके शरीर में पहुंचने से मौत हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ दर्द निवारक दवाएं गंभीर परिस्थितियों में ही दी जाती हैं। इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में होना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय परामर्श दवा का सेवन या उसका गलत तरीके से इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है।
शोधपत्र में इंटरनेट से होने वाले खतरे का विश्लेषण
डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया ने इस घटना को आधार बनाकर शोधपत्र तैयार किया। इसका शीर्षक था- 'Accidental Death Due to Internet Abuse of Therapeutic Drug: The Emerging Threat: A Case Report'।
शोधपत्र में फॉरेंसिक जांच के जरिए यह समझाया गया कि इंटरनेट पर मौजूद अधूरी या भ्रामक जानकारी किस तरह लोगों को खतरनाक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसमें दवा के गलत इस्तेमाल से होने वाले गंभीर परिणामों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मिला पहला स्थान
ICFMT (इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी) की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देशभर के विशेषज्ञों और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। यहां आयोजित पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया के शोधपत्र को पहला स्थान मिला। उन्होंने यह शोध विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. बजरंग कुमार सिंह, डॉ. जेएस तोमर और अन्य फैकल्टी सदस्यों के मार्गदर्शन में तैयार किया।
यह शोध इंटरनेट पर मिलने वाली जानकारी को आंख बंद करके अपनाने के खतरों की ओर ध्यान दिलाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

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