जज की परीक्षा पास की, ज्वानिंग से पहले सन्यास का रास्ता चुना; जैन दीक्षा लेने चलीं प्रखरश्री दीदी की शाही बग्घी से विदाई
पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। विंटेज कारों, शाही बग्घियों और उदयपुर से आए बैंड ने समारोह को खास बना दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पमालाओं से दीक्षार्थियों का स्वागत किया।
MP News: मध्य प्रदेश के बैतूल की एक बेटी की कहानी इन दिनों चर्चा में है। जिस युवती ने जज बनने की परीक्षा पास कर न्याय के क्षेत्र में करियर बनाने का रास्ता तैयार किया, उसने पदभार ग्रहण करने से पहले ही सांसारिक जीवन छोड़ने का फैसला कर लिया। ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी अब जैन साध्वी बनने जा रही हैं। उनके इस फैसले ने बैतूल के जैन समाज के बीच खास चर्चा पैदा कर दी है।
विंटेज कारों और शाही बग्घियों से निकाला गया समारोह
रविवार, 1 नवंबर को बैतूल में पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। इस आयोजन में प्रखरश्री दीदी के साथ चार अन्य बहनें भी शामिल थीं। पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। विंटेज कारों, शाही बग्घियों और उदयपुर से आए बैंड ने समारोह को खास बना दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पमालाओं से दीक्षार्थियों का स्वागत किया।
माता-पिता का सपना पूरा किया, फिर चुना वैराग्य
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता चाहते थे कि वह जज बनें। उन्होंने न्यायिक परीक्षा पास कर अपने माता-पिता की यह इच्छा पूरी कर दी। हालांकि, उनके मन में बचपन से ही वैराग्य की भावना थी। न्यायिक पद पर चयन होने के बावजूद उन्होंने सांसारिक जीवन में आगे बढ़ने के बजाय भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चलने का निर्णय लिया।
उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की सेवा कर सकती थीं, लेकिन संयम और आध्यात्मिक जीवन के जरिए लोगों के लिए कुछ अलग कर पाएंगी। इसी सोच के चलते उन्होंने जैन दीक्षा लेने का फैसला किया।
पांच बहनें 22 नवंबर को लेंगी दीक्षा
बैतूल में आयोजित बिनौली चल समारोह जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म निभाई गई। दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने कहा कि यह हर बेटी की अंतिम विदाई जैसा भावुक समय है। अभी वे रंगीन कपड़ों में हैं, लेकिन दीक्षा के बाद सफेद वस्त्र धारण करेंगी।
प्रखरश्री दीदी के साथ चार अन्य बहनें 22 नवंबर को जैन दीक्षा लेंगी। इसके पहले समाज और परिवार की ओर से उनका सम्मान किया जा रहा है।
शहर में निकली भव्य शोभायात्रा
इस आयोजन में बैतूल के जैन समाज के लोगों के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी शामिल हुए। चल समारोह के दौरान भक्ति गीतों और जयकारों के बीच दीक्षार्थी बहनों का स्वागत किया गया। विंटेज कारों और आकर्षक बग्घियों में सवार दीक्षार्थियों को देखने के लिए शहर में लोगों की भीड़ जुटी।
धार्मिक आयोजन के जरिए समाज ने दीक्षा लेने जा रही बहनों के फैसले का सम्मान किया। प्रखरश्री दीदी के जीवन का यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने एक तरफ अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करते हुए न्यायिक परीक्षा में सफलता हासिल की, वहीं दूसरी तरफ अपने मन की आध्यात्मिक इच्छा को भी प्राथमिकता दी। उनका फैसला करियर और आध्यात्मिक जीवन के बीच अपनी राह चुनने की एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके लिए यह केवल करियर छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि बचपन से मन में रही वैराग्य की भावना को जीवन में अपनाने का कदम है।
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