सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय के पशुपालकों को मिलेगा इनाम, MP में 5 दिवसीय 'गोपाल-कृष्ण ग्राम प्रतियोगिता' का आज आखिरी दिन
इस योजना के तहत पहले स्थान पर आने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 50 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर आने वाले को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए कुल 624 पुरस्कार तय किए हैं।
MP News: मध्य प्रदेश में अब गांवों के बीच दूध उत्पादन बढ़ाने की होड़ शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के मालिकों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के 208 वृंदावन ग्रामों को इस प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। 27 अक्टूबर से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता का आज आखिरी दिन है।
इस योजना के तहत पहले स्थान पर आने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 50 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर आने वाले को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए कुल 624 पुरस्कार तय किए हैं। इन पर करीब 3 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
एक गांव से चुने जाएंगे 3 विजेता
प्रतियोगिता में हर चयनित गांव से सबसे बेहतर दूध उत्पादन करने वाले तीन पशुपालकों का चयन किया जाएगा। इसके लिए गाय के दूध उत्पादन को आधार बनाया जाएगा। इस तरह 208 गांवों से कुल 624 पशुपालकों को पुरस्कार मिलने का मौका मिलेगा।
इस प्रतियोगिता में समाज के सभी वर्गों के पशुपालक हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, एक परिवार से केवल एक पशुपालक या एक गाय को ही प्रतियोगिता में शामिल होने की अनुमति होगी।
गिर और साहीवाल जैसी देशी नस्लों पर जोर
सरकार का मकसद केवल दूध उत्पादन की प्रतियोगिता कराना नहीं है, बल्कि देशी गायों की अच्छी नस्लों को बचाना और बढ़ावा देना भी है। इसके लिए गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी जैसी देशी नस्लों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन नस्लों की गायों को दूध उत्पादन के लिए बेहतर माना जाता है। सरकार चाहती है कि पशुपालक इन नस्लों को अपनाएं और आधुनिक तरीके से पशुपालन करें। इससे दूध उत्पादन बढ़ने के साथ पशुपालकों की आमदनी में भी सुधार हो सकता है।
इनाम की रकम से खरीदनी होगी देशी गाय
योजना की एक खास शर्त यह भी है कि पुरस्कार में मिलने वाली पूरी रकम का इस्तेमाल देशी गोवंश की खरीद, संरक्षण और संवर्धन के लिए करना होगा। यानी पशुपालक इस पैसे को किसी दूसरे काम में खर्च नहीं कर सकेंगे। इस व्यवस्था के जरिए सरकार चाहती है कि पुरस्कार की रकम दोबारा पशुपालन के काम में लगे और गांवों में अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़े।
2027-28 से प्रदेश के सभी 313 ब्लॉक में होगी प्रतियोगिता
पहले साल यह प्रतियोगिता केवल 208 चयनित वृंदावन ग्रामों में आयोजित की जा रही है। योजना के दूसरे चरण में इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में प्रतियोगिता कराने की योजना है। इससे छोटे और बड़े सभी क्षेत्रों के पशुपालकों को अपनी गायों की दूध उत्पादन क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा।
गोवर्धन पूजा पर दिए जाएंगे पुरस्कार
योजना के तहत विजेताओं को हर साल गोवर्धन पूजा के अवसर पर सम्मानित करने की व्यवस्था भी की गई है। प्रतियोगिता के निष्पक्ष संचालन के लिए विकासखंड और जिला स्तर पर समितियां बनाई गई हैं।
विकासखंड स्तर पर अधिकारी पशुपालकों के आवेदन और गायों के दूध उत्पादन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेंगे। इसके बाद जिला स्तरीय समिति परिणामों का सत्यापन कर विजेताओं के नाम तय करेगी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य गांवों को दूध उत्पादन और देशी पशुओं के संरक्षण का केंद्र बनाना है। यदि योजना सही तरीके से लागू होती है तो इससे प्रदेश में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।



