'चाचा की तेरहवीं थी, दिल्ली कैसे चला जाता', MP यूथ कांग्रेस के महासचिव ने दी सफाई, कहा- बिना नोटिस निलंबित किया
रोहित राजोरिया का कहना है कि संगठन ने निलंबन से पहले उनसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि अगर संगठन को उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल था, तो पहले उनसे बात की जा सकती थी।
MP News: मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस में दिल्ली की रैली में शामिल नहीं होने पर की गई कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। संगठन ने 60 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें प्रदेश महासचिव रोहित राजोरिया भी शामिल हैं। राजोरिया ने अपने निलंबन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके चाचा की तेरहवीं का कार्यक्रम था, इसलिए वे दिल्ली नहीं जा सके। उनका दावा है कि उन्होंने संगठन को अपनी पारिवारिक मजबूरी की जानकारी पहले ही दे दी थी, इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
रोहित राजोरिया ने कहा कि वे लंबे समय से कांग्रेस और युवा कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी परिस्थितियों को जाने बिना निलंबन का फैसला लेना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संगठन को उनके घर में हुए निधन और तेरहवीं की जानकारी थी, तो उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया।
रैली में शामिल न होने पर 60 पदाधिकारी निलंबित
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ रैली में शामिल नहीं होने वाले 60 पदाधिकारियों पर कार्रवाई की है। 3 नवंबर को जारी आदेश में इन्हें तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित किया गया है।
निलंबित पदाधिकारियों में 9 जिलाध्यक्ष, 5 उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता माना है। यह कार्रवाई भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर की गई है। रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को उठाया था।
बिना नोटिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
रोहित राजोरिया का कहना है कि संगठन ने निलंबन से पहले उनसे कोई कारण बताओ नोटिस नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि अगर संगठन को उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल था, तो पहले उनसे बात की जा सकती थी।
राजोरिया के मुताबिक, उन्हें निलंबन की जानकारी मिलने के बाद अपनी बात रखने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की पारिवारिक परिस्थितियों को भी समझना चाहिए। उनका आरोप है कि बिना सुनवाई के कार्रवाई करना संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है। राजोरिया ने यह भी कहा कि वे पार्टी के भीतर ही अपनी बात रखना चाहते हैं। इसके लिए वे राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क करेंगे और जरूरत पड़ने पर राहुल गांधी से मुलाकात भी करेंगे।
कहा- 2010 से संगठन के लिए कार्य कर रहा
रोहित राजोरिया ने अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि वे 2010 से NSUI और युवा कांग्रेस में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। उनके मुताबिक, राजनीतिक गतिविधियों के दौरान उनके खिलाफ करीब 12 मामले दर्ज हुए और वे तीन बार जेल भी जा चुके हैं।
राजोरिया ने कहा कि इतने वर्षों तक संगठन के लिए काम करने के बाद इस तरह का फैसला उनके लिए दुखद है। उन्होंने नए नेताओं को आगे बढ़ाने का समर्थन किया, लेकिन साथ ही पुराने कार्यकर्ताओं को भी उचित जिम्मेदारी देने की मांग की।
अब हाईकमान तक पहुंचेगा मामला
निलंबन के बाद रोहित राजोरिया ने अपनी बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे कांग्रेस छोड़ने के बजाय संगठन के भीतर ही अपनी शिकायत रखेंगे।
फिलहाल युवा कांग्रेस की ओर से निलंबन वापस लेने को लेकर कोई फैसला सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय नेतृत्व राजोरिया की पारिवारिक मजबूरी और उनके आरोपों पर क्या रुख अपनाता है।



