साइबर ठगों के निशाने पर इंदौर! 10 महीने में 50 करोड़ ठगे; डिजिटल अरेस्ट और APK फाइल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल
कई मामलों में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वहीं, निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा देने का लालच देकर पहले छोटी रकम का फायदा दिखाया जाता है।
MP News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन लेनदेन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर ठग लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। साल 2026 में अब तक इंदौर पुलिस को साइबर ठगी से जुड़ी करीब 7 हजार शिकायतें मिली हैं। इन मामलों में लोगों को लगभग 50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राहत की बात यह है कि पुलिस की कार्रवाई से करीब 7 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए जा चुके हैं। हालांकि, बाकी रकम की वापसी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हर दिन नए तरीके से लोगों को बना रहे निशाना
इंदौर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया के मुताबिक, साइबर अपराधी अब एक ही तरीके से ठगी नहीं कर रहे हैं। वे लोगों की जरूरत, डर और लालच का फायदा उठाकर अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश, गेमिंग, वर्क फ्रॉम होम और मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाकर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं।
कई मामलों में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वहीं, निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा देने का लालच देकर पहले छोटी रकम का फायदा दिखाया जाता है। इसके बाद पीड़ित से बड़ी रकम जमा करवा ली जाती है।
AI से आवाज और चेहरा बदलकर भी ठगी
साइबर अपराधियों ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। इसके जरिए किसी परिचित या रिश्तेदार की आवाज और चेहरा नकल किया जा सकता है। ठग ऐसी आवाज में फोन करके दुर्घटना, अस्पताल या किसी आपात स्थिति का बहाना बनाते हैं और तुरंत पैसे भेजने को कहते हैं।
ऐसे मामलों में लोग घबराकर बिना जांच किए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी परिचित की आवाज सुनकर ही भरोसा न करें। पैसे भेजने से पहले उस व्यक्ति से किसी दूसरे नंबर पर संपर्क करके पुष्टि जरूर करें।
450 से ज्यादा फर्जी अकाउंट ब्लॉक कराए गए
इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच 350 से ज्यादा हैक किए गए सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर कराए हैं। इसके अलावा लोगों के नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल कर बनाए गए 450 से अधिक फर्जी अकाउंट ब्लॉक कराए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान लिंक को खोलने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। मोबाइल में किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा अनुमति देना भी खतरा बन सकता है।
ठगी होते ही तुरंत करें शिकायत
साइबर ठगी के मामले में शुरुआती समय बेहद अहम होता है। अगर पैसे ट्रांसफर होने के तुरंत बाद शिकायत की जाए, तो संबंधित बैंक खाते में रकम को रोकने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। इंदौर क्राइम ब्रांच की साइबर हेल्पलाइन 704912-4445 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
पुलिस का कहना है कि जागरूकता और समय पर शिकायत से साइबर ठगी के नुकसान को कम किया जा सकता है।
