Ramayana Part 1 Review: रणबीर कपूर की मर्यादा और यश का रौद्र अवतार छाया, शानदार VFX के बावजूद संगीत ने किया निराश
4000 करोड़ की रामायण पार्ट 1 में रणबीर कपूर ने भगवान राम और यश ने रावण का किरदार निभाया है। यश का रौद्र अवतार और साई पल्लवी की अदाकारी फिल्म की खासियत हैं। शानदार VFX के बावजूद धीमी कहानी, कमजोर संवाद और संगीत की कमी खलती है।

Ramayana Part 1 Movie Review: करीब 4000 करोड़ रुपये के बजट में तैयार 'रामायण पार्ट 1' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, यश रावण और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच लंबे समय से उत्सुकता थी। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल सिनेमाई संसार, भव्य सेट और आधुनिक VFX हैं। रणबीर ने राम के किरदार में शालीनता दिखाई है, वहीं यश का रावण अवतार अपने दमदार अंदाज से ध्यान खींचता है। हालांकि, संगीत और कुछ संवाद उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ते। आइए जानते हैं कि रामायण का पहला भाग कहानी से लेकर अभिनय तक कितना असरदार है।
कहानी: रावण के उदय से शुरू होती है रामायण की महागाथा
बता दें, फिल्म की शुरुआत भगवान राम के बजाय रावण की कहानी से होती है। दशानन यानी रावण (यश) अपनी तपस्या और शक्ति के दम पर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करता है। इसके बाद उसका साम्राज्य फैलने लगता है। वह इंद्र को पराजित करता है और कुबेर से लंका का अधिकार हासिल कर लेता है। फिल्म में उसके ज्ञान, पराक्रम और बढ़ते अहंकार को विस्तार से दिखाया गया है।
इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म होता है। बड़े होने पर राम का विवाह सीता (साई पल्लवी) से होता है। सब कुछ सामान्य चल रहा होता है, लेकिन कैकेयी के दो वरदान पूरे करने के कारण राम को 14 वर्षों के वनवास पर जाना पड़ता है। उनके साथ सीता और लक्ष्मण (रवि दुबे) भी वन की ओर निकल जाते हैं।
वनवास के दौरान शूर्पणखा और मारीच के प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं। स्वर्ण मृग के पीछे राम और लक्ष्मण के जाने के बाद रावण साधु का वेश धारण कर सीता का हरण कर लेता है। जटायु उन्हें बचाने के लिए रावण से मुकाबला करता है, लेकिन घायल होकर राम को पूरी घटना बताता है।
सीता हरण और जटायु के बलिदान के साथ फिल्म का पहला भाग समाप्त होता है। अंत में पोस्ट क्रेडिट सीन में हनुमान जी के रूप में सनी देओल की झलक दिखाई जाती है। उनका चेहरा सामने नहीं आता, लेकिन 'जय श्रीराम' का उद्घोष अगले भाग को लेकर उत्सुकता बढ़ा देता है।
एक्टिंग: यश का रौद्र रूप और रणबीर की सौम्यता बनी खासियत
भगवान राम का किरदार निभाना रणबीर कपूर के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस भूमिका में गंभीरता, संयम और शालीनता को प्राथमिकता दी है। उनके हावभाव में राम की मर्यादा और शांत स्वभाव दिखाने की कोशिश नजर आती है।
वहीं यश रावण के किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और पर्दे पर मौजूदगी किरदार को भव्य बनाती है। रावण की शक्ति, क्रोध और राजसी ठाठ को उन्होंने अपने अभिनय से उभारा है। खासकर उनकी एंट्री और बड़े दृश्यों में उनका अंदाज ध्यान खींचता है।
साई पल्लवी ने सीता के किरदार में सहजता और भावनात्मक गहराई दिखाई है। रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में अपने किरदार के प्रति समर्पण दिखाते हैं। लारा दत्ता कैकेयी, अरुण गोविल दशरथ, शिबा चड्ढा मंथरा और रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा की भूमिका में नजर आते हैं। वहीं सनी देओल की छोटी सी झलक अगले भाग के लिए कहानी में नई उम्मीद जगाती है।
डायरेक्शन: नितेश तिवारी ने पौराणिक कहानी को दिया विशाल कैनवास
'दंगल' और 'छिछोरे' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके नितेश तिवारी के सामने इस बार बेहद अलग चुनौती थी। रामायण केवल एक फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी महागाथा है।
निर्देशक ने कहानी की शुरुआत रावण के जीवन से करके एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है। इसके जरिए दर्शकों को लंका और अयोध्या दोनों की दुनिया समझने का मौका मिलता है। भव्य महल, राजसी जीवन और पौराणिक घटनाओं को बड़े स्तर पर दिखाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, कुछ जगहों पर संवादों में और प्रभाव पैदा किया जा सकता था। राम और रावण जैसे विशाल किरदारों के संवादों से जिस गहराई और यादगार अंदाज की उम्मीद रहती है, वह हर दृश्य में महसूस नहीं होती।
स्क्रीनप्ले: घटनाएं दमदार, लेकिन कहानी की रफ्तार कहीं-कहीं धीमी
रामायण की कहानी लगभग सभी जानते हैं। ऐसे में फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिचित घटनाओं को नए सिनेमाई अंदाज में पेश करना है।
रावण के उदय से लेकर राम के वनवास और सीता हरण तक की घटनाओं को पहले भाग में समेटा गया है। कहानी आगे के बड़े संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार करती है। हालांकि, 3 घंटे 15 मिनट की लंबाई कुछ दृश्यों में भारी महसूस होती है।
कई प्रसंगों को थोड़ा और कसाव के साथ दिखाया जा सकता था। इसके बावजूद फिल्म का अंत अगले अध्याय को लेकर दर्शकों की जिज्ञासा बनाए रखता है।
VFX और सिनेमैटोग्राफी: अयोध्या से लंका तक दिखा भव्य संसार
फिल्म का सबसे आकर्षक पक्ष इसका विजुअल ट्रीटमेंट है। अयोध्या की राजसी सुंदरता, लंका का विशाल साम्राज्य, महलों की बनावट और पौराणिक वातावरण को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है।
VFX, प्रोडक्शन डिजाइन, कॉस्ट्यूम और सिनेमैटोग्राफी मिलकर फिल्म को एक अलग सिनेमाई अनुभव देते हैं। कई दृश्य बड़े पर्दे पर शानदार नजर आते हैं।
हालांकि, कुछ राक्षसी किरदारों और मायावी प्राणियों के दृश्यों में कंप्यूटर ग्राफिक्स की कृत्रिमता दिखाई देती है। उनके लुक और मूवमेंट को और बेहतर बनाया जा सकता था। कुल मिलाकर तकनीकी स्तर पर फिल्म की कोशिश प्रभावशाली है।
म्यूजिक: रहमान और हंस जिमर से थी यादगार धुनों की उम्मीद
फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान और हंस जिमर जैसे दिग्गजों से जुड़ा है। ऐसे में उम्मीद थी कि रामायण को ऐसी धुनें मिलेंगी, जो इसके किरदारों की पहचान बन जाएंगी।
राम की मौजूदगी में गरिमा और रावण के दृश्यों में शक्ति का एहसास कराने वाला बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को और प्रभावी बना सकता था। कुछ दृश्यों में संगीत माहौल तैयार करता है, लेकिन कोई ऐसी थीम उभरकर सामने नहीं आती जो लंबे समय तक याद रहे।
यही वजह है कि फिल्म का संगीत उसके शानदार विजुअल्स के मुकाबले थोड़ा कमजोर महसूस होता है। डायलॉग और बैकग्राउंड स्कोर में और प्रभाव की गुंजाइश थी।
Ramayana Part 1 Verdict: भव्यता देखने लायक, दूसरे भाग का इंतजार बढ़ा
'रामायण पार्ट 1' बड़े बजट और विशाल विजुअल स्केल के साथ भारतीय सिनेमा की महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल होती है। रणबीर कपूर की गंभीरता, यश का रौद्र रूप और साई पल्लवी की सहज अदाकारी फिल्म को मजबूती देते हैं।
VFX और प्रोडक्शन डिजाइन इसकी बड़ी खूबियां हैं, लेकिन धीमी रफ्तार, कुछ कमजोर संवाद और संगीत की कमी अनुभव को पूरी तरह यादगार नहीं बनने देते।
अगर आप पौराणिक कहानियों और भव्य सिनेमाई प्रस्तुतियों में दिलचस्पी रखते हैं, तो फिल्म देख सकते हैं। पहला भाग सीता हरण पर खत्म होता है और अब दर्शकों को हनुमान जी की भूमिका, लंका यात्रा और राम-रावण युद्ध के लिए अगले भाग का इंतजार रहेगा।



