सिंहस्थ 2028 में हर दिन 13 हजार टन सब्जियों की जरूरत होगी, 20 हजार किसानों को जोड़ने की तैयारी
सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की जरूरतें पूरी करने के लिए यह तैयारी अहम है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान, भंडारण केंद्र और परिवहन व्यवस्था आयोजन के दौरान कितने बेहतर तालमेल से काम करते हैं।
Simhastha 2028: सिंहस्थ-2028 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और पूजा-पाठ से जुड़ी जरूरतें पूरी करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अभी से सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। उद्यानिकी विभाग की योजना के तहत प्रदेश के करीब 15 जिलों में 16 हजार हेक्टेयर जमीन पर खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें 20 हजार से ज्यादा किसानों को जोड़ने की तैयारी है।
हर दिन 13 हजार टन सब्जियों की जरूरत
सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से सब्जियों की मांग काफी बढ़ सकती है। विभाग के आकलन के मुताबिक, आयोजन के दौरान रोज करीब 13 हजार टन सब्जियों की जरूरत पड़ सकती है। दो महीने के पूरे आयोजन में यह मांग लगभग 8 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक खपत भोजन और ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी निर्भर करेगी।
सात जिलों में सब्जियां, आठ जिलों में फूलों की खेती
योजना के तहत सब्जियों और फूलों के उत्पादन के लिए अलग-अलग क्लस्टर बनाए जाएंगे। क्लस्टर का मतलब है कि एक क्षेत्र के कई किसान तय योजना के अनुसार फसल उगाएंगे, ताकि जरूरत के हिसाब से उत्पादन और सप्लाई का अनुमान लगाया जा सके।
सब्जियों की खेती के लिए उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर को चुना गया है। इन जिलों में करीब 8 हजार हेक्टेयर जमीन पर हाइब्रिड सब्जियों की खेती बढ़ाने की योजना है। वहीं, फूलों के उत्पादन के लिए उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर-मालवा, खंडवा, छतरपुर, मैहर और दतिया में करीब 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। इससे धार्मिक आयोजन के दौरान फूलों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
किसानों को प्रशिक्षण, फसल बचाने पर भी जोर
विभाग किसानों की पहचान कर उन्हें खेती से जुड़ा प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि गर्मी और बारिश के मौसम में फसलों को बीमारियों और नुकसान से कैसे बचाया जाए। योजना का मकसद सिर्फ खेती का रकबा बढ़ाना नहीं, बल्कि सिंहस्थ के समय जरूरत के मुताबिक उपज उपलब्ध कराना भी है।
खेत से उज्जैन तक पहुंचेगी उपज
सब्जियां जल्दी खराब होने वाली फसलें हैं। इसलिए उत्पादन बढ़ाने के साथ उन्हें समय पर उज्जैन तक पहुंचाना भी जरूरी होगा। इसके लिए क्लस्टर के आसपास संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग-पैकिंग यूनिट और जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सब्जियों और फूलों के उत्पादन व सप्लाई का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे पता चल सकेगा कि किस जिले से कितनी उपज मिल रही है और कहां कितनी जरूरत है। किसी क्षेत्र में फसल खराब होने या उत्पादन कम होने पर दूसरे जिलों से आपूर्ति बढ़ाने की व्यवस्था बनाई जा सकेगी।
सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की जरूरतें पूरी करने के लिए यह तैयारी अहम है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान, भंडारण केंद्र और परिवहन व्यवस्था आयोजन के दौरान कितने बेहतर तालमेल से काम करते हैं।
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